चीन के विरोध के बाद जापान के विवादित युद्ध स्मारक में पोकेमॉन कार्ड इवेंट रद्द
चीन के विरोध के बाद जापान के यासुकुनी श्राइन में होने वाला पोकेमॉन कार्ड इवेंट रद्द कर दिया गया। पोकेमॉन कंपनी ने माफी मांगते हुए कहा कि कार्यक्रम की जानकारी गलती से वेबसाइट पर डाली गई थी।
जापान के युद्ध में मारे गए सैनिकों की याद में बने विवादित यासुकुनी श्राइन में आयोजित होने वाला पोकेमॉन कार्ड गेम इवेंट चीन के कड़े विरोध के बाद रद्द कर दिया गया है। यह कार्यक्रम शनिवार (31 जनवरी, 2026) को आयोजित किया जाना था। बढ़ते विवाद के बीच पोकेमॉन कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर इस कार्यक्रम की जानकारी साझा करने के लिए माफी भी मांगी है।
यासुकुनी श्राइन में जापान के लगभग 25 लाख युद्ध मृतकों को सम्मानित किया जाता है, जिनमें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दोषी ठहराए गए युद्ध अपराधी भी शामिल हैं। जापानी आक्रामकता का शिकार रहे देश, विशेष रूप से चीन और कोरियाई प्रायद्वीप के देश, इस श्राइन में होने वाली गतिविधियों और नेताओं की यात्राओं को जापान के अपने युद्धकालीन अतीत पर पश्चाताप के रूप में देखते हैं।
इस कार्यक्रम को लेकर चीन के सरकारी मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सख्त सेंसरशिप है और सरकार यह तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है कि कौन से विषय ट्रेंड करेंगे।
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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के आधिकारिक मुखपत्र ‘पीपुल्स डेली’ ने वीबो पर लिखा कि जो ब्रांड इतिहास की अनदेखी करते हैं और चीनी जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं, वे अंततः बाजार द्वारा नकार दिए जाएंगे। उसने यह भी कहा कि संबंधित कंपनियों को सामाजिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए और मनोरंजन के नाम पर इतिहास के बोझ को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
निन्टेंडो से संबद्ध पोकेमॉन कंपनी ने जापानी और चीनी दोनों भाषाओं में माफी जारी करते हुए बताया कि यह कार्यक्रम बच्चों के लिए एक प्रमाणित पोकेमॉन कार्ड खिलाड़ी द्वारा निजी तौर पर आयोजित किया गया था, लेकिन इसकी जानकारी गलती से कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर साझा हो गई। कंपनी ने कहा कि यह ऐसा कार्यक्रम था जिसे शुरू से ही आयोजित नहीं किया जाना चाहिए था।
पोकेमॉन कंपनी ने अपने नारे “पोकेमॉन के जरिए दुनिया को जोड़ना” का हवाला देते हुए सभी के प्रति संवेदनशील रहने की प्रतिबद्धता जताई।
यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब जापान और चीन के बीच तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। नवंबर में प्रधानमंत्री साने ताकाइची के उस बयान के बाद चीन नाराज है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि चीन ताइवान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करता है तो जापान हस्तक्षेप कर सकता है। इसके बाद चीन ने जापान के खिलाफ आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ा दिया था। ताकाइची पहले यासुकुनी श्राइन में नियमित रूप से जाती थीं, हालांकि अक्टूबर में पद संभालने के बाद उन्होंने वहां प्रार्थना नहीं की है।
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