पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किला रायपुर ग्रामीण ओलंपिक में बैलगाड़ी रेस की वापसी की, धमाकेदार तरीके से आयोजन हुआ
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किला रायपुर ग्रामीण ओलंपिक में बैलगाड़ी रेस की वापसी की घोषणा की। तीन दिवसीय कार्यक्रम में कबड्डी, हॉकी और पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया।
पंजाब में बुधवार को एक बड़ा सांस्कृतिक पुनर्निर्माण हुआ जब किला रायपुर ग्रामीण ओलंपिक ने लुधियाना के किला रायपुर के ऐतिहासिक मैदानों में वापसी की। इस कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किया। इस आयोजन के साथ बैलगाड़ी रेस का भी शानदार तरीके से पुनः आगमन हुआ, जो कई वर्षों बाद वापस आई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह तीन दिवसीय खेल महोत्सव पंजाब की ग्रामीण धरोहर और खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पारंपरिक खेलों को किया गया प्रमुख स्थान
इस रंगारंग महोत्सव में हॉकी, कबड्डी, एथलेटिक्स और कई पारंपरिक ग्रामीण खेलों का आयोजन किया जा रहा है। बैलगाड़ी रेस की वापसी के साथ-साथ 19 फरवरी को 65, 75 और 80 साल से ऊपर के पुरुषों के लिए विशेष 100 मीटर रेस का आयोजन भी होगा। अन्य आयोजनों में ट्रॉली लोडिंग, ट्राइसाइकिल रेस और अन्य अनोखे मुकाबले शामिल हैं, जो वरिष्ठ प्रतिभागियों की शक्ति और चुस्ती को उजागर करते हैं।
CM मान ने सुरक्षा और नैतिक आचरण पर दिया जोर
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया कि बैलगाड़ी रेस को पूरी तरह से सुरक्षा उपायों के साथ आयोजित किया जा रहा है ताकि पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि ये बैल परिवार के सदस्य जैसे होते हैं और उनके मालिक इन्हें सशक्त तरीके से पालते हैं।
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जनभागीदारी को बढ़ावा
सीएम मान ने पंजाबवासियों और खेल प्रेमियों से आग्रह किया कि वे "ग्रामीण ओलंपिक" के उत्सव में भाग लें, जो पंजाब की सांस्कृतिक पहचान और ग्रामीण जड़ों को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।
सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्थाएं
आयोजकों ने बताया कि भीड़ प्रबंधन, चिकित्सा सहायता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक तैयारी की गई है। स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवकों को स्थल पर तैनात किया गया है ताकि वे प्रतिभागियों और आगंतुकों को मार्गदर्शन कर सकें।
बैलगाड़ी रेस की वापसी
बता दें कि बैलगाड़ी रेस पहले किला रायपुर खेल महोत्सव में आयोजित नहीं हो रही थी। 2014 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इस आयोजन पर रोक लगा दी थी, क्योंकि यह पशुओं पर क्रूरता रोकने वाले कानून का उल्लंघन कर रहा था। बाद में, पंजाब सरकार ने 2019 में पशु क्रूरता विरोधी (पंजाब संशोधन) विधेयक पारित किया, जिससे रेस की वापसी संभव हुई।
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