राज्यसभा से पारित हुआ एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक, विपक्ष के वॉकआउट के बीच राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा
राज्यसभा ने विपक्ष के वॉकआउट के बीच एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पारित किया। अब यह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसमें कड़ी सजा का प्रावधान है।
लोकसभा से पारित होने के एक दिन बाद गुरुवार को राज्यसभा ने विपक्ष के हंगामे और वॉकआउट के बीच सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 (एंटी पेपर लीक विधेयक) को मंजूरी दे दी। अब यह विधेयक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून के रूप में लागू हो जाएगा।
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह सरकार की छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के प्रति सर्वोच्च प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह विधेयक पहले ही लोकसभा में लगभग 10 घंटे की विस्तृत चर्चा के बाद पारित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि लगातार व्यवधानों के बावजूद सरकार ने सभी सवालों का जवाब दिया और अब यह विधेयक वरिष्ठ सदन के विचारार्थ प्रस्तुत किया गया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एंटी पेपर लीक कानून सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने राज्यसभा के सदस्यों से विधेयक पर सकारात्मक चर्चा करने और इसे पारित करने का आग्रह किया।
और पढ़ें: यूक्रेनी ड्रोन हमले के बाद रूस के वोल्गोग्राद में ऊर्जा केंद्र और गोदामों में लगी आग
बहस के दौरान केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष इस विधेयक का विरोध अपने "निहित स्वार्थों" के कारण कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक देश में सार्वजनिक परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए कोई व्यापक कानून नहीं था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने वर्ष 2024 में इस दिशा में पहला कानून बनाया।
सरकार ने यह संशोधन विधेयक ऐसे समय पेश किया है, जब नीट परीक्षा विवाद और कथित पेपर लीक के खिलाफ देशभर में छात्रों के प्रदर्शन हुए थे। इन घटनाओं के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया था।
संशोधित विधेयक में पेपर लीक में शामिल दोषियों के लिए सजा और अधिक कड़ी करने का प्रस्ताव है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 वर्ष की कैद और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। मानसून सत्र के दौरान विपक्ष लगातार नीट पेपर लीक मुद्दे पर सरकार को घेरता रहा, जिसके कारण कई बार संसद की कार्यवाही भी बाधित हुई।