ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में पदकों के साथ ज्ञान हस्तांतरण भी अहम: रोहित राजपाल
भारत के शेफ डी मिशन रोहित राजपाल ने कहा कि ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में पदकों के साथ अनुभव और ज्ञान हासिल करना भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि भारत 2030 खेलों की मेजबानी करेगा।
आगामी ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की सफलता को केवल पदकों की संख्या से नहीं मापा जाएगा, बल्कि इस बात से भी आंका जाएगा कि देश भविष्य के लिए कितना ज्ञान और अनुभव हासिल करता है। भारत के शेफ डी मिशन रोहित राजपाल ने कहा है कि 2030 में अहमदाबाद में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी के लिए इस बार का अनुभव बेहद महत्वपूर्ण होगा।
राष्ट्रमंडल खेलों का 23वां संस्करण 23 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। हालांकि इस बार प्रतियोगिता का स्वरूप काफी सीमित रखा गया है। ग्लासगो खेलों में केवल 10 खेलों को शामिल किया गया है, जो बर्मिंघम 2022 की तुलना में नौ खेल कम हैं। बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 61 पदक जीते थे, जिसमें 22 स्वर्ण, 16 रजत और 23 कांस्य पदक शामिल थे। भारत उस प्रतियोगिता में पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा था।
भारतीय डेविस कप टीम के गैर-खिलाड़ी कप्तान रोहित राजपाल ने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि इस बार खेलों से जुड़े गैर-खेल पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं है, बल्कि आयोजन प्रबंधन, खिलाड़ियों की सुविधाओं, तकनीकी व्यवस्था और अन्य क्षेत्रों में अनुभव हासिल करना भी है।
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राजपाल ने कहा कि ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल भारत के लिए सीखने का एक बड़ा अवसर होंगे। इससे देश को 2030 में अहमदाबाद में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन के लिए बेहतर तैयारी करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन की सफलता केवल मैदान पर प्रदर्शन से तय नहीं होती, बल्कि उसके पीछे की व्यवस्थाएं, योजना और संचालन भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। भारत इस बार खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने के साथ-साथ भविष्य की मेजबानी के लिए जरूरी अनुभव जुटाने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय दल से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। खिलाड़ियों के साथ-साथ अधिकारियों की नजरें भी इस आयोजन से मिलने वाले अनुभव और सीख पर रहेंगी।