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बैडमिंटन की महान खिलाड़ी साइना नेहवाल ने किया संन्यास का ऐलान, सिंधु और कोहली ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

साइना नेहवाल ने पेशेवर बैडमिंटन से संन्यास की पुष्टि की। पीवी सिंधु और विराट कोहली ने उनके ऐतिहासिक करियर और भारतीय बैडमिंटन में योगदान को सलाम किया।

भारतीय बैडमिंटन की सबसे चमकदार सितारों में से एक साइना नेहवाल ने पेशेवर खेल से संन्यास की पुष्टि कर दी है। पूर्व विश्व नंबर एक रह चुकी साइना के इस फैसले के साथ भारतीय बैडमिंटन के एक ऐतिहासिक युग का अंत हो गया। उनके संन्यास की खबर के बाद दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु और पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान विराट कोहली ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

साइना ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपने संन्यास की बात स्वीकार की। उन्होंने बताया कि यह फैसला उन्होंने अपनी शर्तों पर लिया और उन्हें किसी औपचारिक घोषणा की आवश्यकता महसूस नहीं हुई। साइना आखिरी बार 2023 में बीडब्ल्यूएफ सिंगापुर ओपन में प्रतिस्पर्धा करती नजर आई थीं।

पीवी सिंधु ने सोशल मीडिया पर लिखा कि साइना ने भारतीय बैडमिंटन को जो योगदान दिया है, उसके लिए पूरा देश उनका आभारी है और उनके आने वाले जीवन के लिए शांति और खुशहाली की कामना की। विराट कोहली ने साइना के करियर को “ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय बैडमिंटन को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई और देश को उन पर गर्व है।

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साइना ने 2008 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। उसी साल बीजिंग ओलंपिक में वह एकल स्पर्धा के क्वार्टरफाइनल तक पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। 2009 में इंडोनेशिया ओपन जीतकर उन्होंने भारत को पहली बार बीडब्ल्यूएफ सुपर सीरीज खिताब दिलाया।

2012 लंदन ओलंपिक में जीता गया कांस्य पदक भारतीय बैडमिंटन का पहला ओलंपिक पदक था, जिसे खेल के लिए मील का पत्थर माना जाता है। 2015 में साइना विश्व नंबर एक बनीं और विश्व चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुंचीं।

रियो ओलंपिक 2016 के बाद घुटनों की चोटों ने उनके करियर को प्रभावित किया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने 2017 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य और 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता। पद्म भूषण, पद्म श्री, खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित साइना ने 2024 में बताया था कि घुटनों में गठिया और कार्टिलेज पूरी तरह घिस जाने के कारण खेल जारी रखना संभव नहीं रहा। उनका संन्यास भारतीय बैडमिंटन की मजबूत नींव रखने वाले स्वर्णिम अध्याय का समापन है।

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