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सेंसेक्स और निफ्टी लगातार तीसरे दिन बढ़त के साथ बंद, ऑटो और वित्तीय शेयरों ने दिखाई मजबूती

ऑटो और वित्तीय शेयरों की मजबूती से सेंसेक्स और निफ्टी लगातार तीसरे दिन बढ़त के साथ बंद हुए। आईटी शेयरों में मुनाफावसूली रही, जबकि निवेशकों की नजर तिमाही नतीजों पर है।

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक ऑटोमोबाइल और वित्तीय सेवा क्षेत्र के शेयरों में मजबूत खरीदारी के दम पर बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि, हालिया तेजी के बाद सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे इस क्षेत्र पर दबाव बना रहा।

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 166.49 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,094.64 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 66.45 अंक यानी 0.27 प्रतिशत चढ़कर 24,383.60 अंक पर पहुंच गया।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,300 अंक का स्तर तत्काल समर्थन के रूप में उभरकर सामने आया है, जबकि इसके नीचे 24,200 अंक अगला महत्वपूर्ण समर्थन स्तर माना जा रहा है। उनका कहना है कि यदि निफ्टी इन स्तरों के ऊपर बना रहता है तो मौजूदा रिकवरी का रुख जारी रह सकता है। वहीं, 24,200 अंक से नीचे बंद होने पर दोबारा मुनाफावसूली का दबाव बढ़ सकता है।

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निफ्टी में सबसे अधिक बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज शामिल रहे। वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में लगातार खरीदारी का रुझान देखने को मिला, जिससे बाजार को मजबूत समर्थन मिला।

व्यापक बाजार का प्रदर्शन भी सकारात्मक रहा। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप दोनों सूचकांक 0.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए, जो निवेशकों के सकारात्मक रुझान को दर्शाता है।

क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो ऑटोमोबाइल शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और प्रमुख सूचकांकों की तेजी में महत्वपूर्ण योगदान दिया। एफएमसीजी क्षेत्र के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इसके विपरीत, निफ्टी आईटी सूचकांक में पांच दिनों से जारी तेजी का सिलसिला टूट गया। वैश्विक चिप कंपनियों के शेयरों में मजबूती के बावजूद निवेशकों ने आईटी शेयरों में मुनाफावसूली की।

विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में सकारात्मक रुख बना हुआ है, लेकिन ऊंचे स्तरों पर कुछ निवेशकों ने लाभ वसूला। उनका मानना है कि वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल, संभावित ब्याज दर वृद्धि की आशंकाएं और अंतरराष्ट्रीय जोखिम अभी भी निवेशकों की सतर्कता का कारण बने हुए हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, बाजार की आगे की दिशा मुख्य रूप से कंपनियों के तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी। यदि अधिकांश क्षेत्रों में आय में सुधार देखने को मिलता है और वैश्विक जोखिम कम होते हैं, तो शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।

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