स्काईरूट के विक्रम-1 रॉकेट की लॉन्चिंग का काउंटडाउन शुरू, भारत के पहले निजी अंतरिक्ष रॉकेट पर टिकी नजरें
स्काईरूट एयरोस्पेस आज विक्रम-1 रॉकेट का पहला परीक्षण प्रक्षेपण करेगा। यह भारत का पहला निजी ऑर्बिटल क्लास रॉकेट है, जो देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में नई शुरुआत करेगा।
भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए शनिवार का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। स्काईरूट एयरोस्पेस अपने पहले निजी ऑर्बिटल क्लास रॉकेट विक्रम-1 का परीक्षण प्रक्षेपण करने जा रहा है। इस मिशन को "मिशन आगमन" नाम दिया गया है। रॉकेट का प्रक्षेपण 18 जुलाई 2026 को सुबह 11:30 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी-शार), श्रीहरिकोटा से किया जाएगा।
यह भारत में किसी निजी कंपनी द्वारा विकसित ऑर्बिटल रॉकेट का पहला प्रक्षेपण प्रयास होगा। इससे पहले स्काईरूट ने 18 नवंबर 2022 को विक्रम-एस रॉकेट के सफल प्रक्षेपण के साथ इतिहास रचा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को इस ऐतिहासिक मिशन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच पर लिखा कि विक्रम-1 चार चरणों वाला रॉकेट है, जिसे तेज और जरूरत के अनुसार उपग्रह प्रक्षेपण सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत के युवाओं की प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और उद्यमशीलता को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों से निजी कंपनियों के लिए नए अवसर खुले हैं और यह मिशन नवाचार और निजी भागीदारी को बढ़ावा देगा।
मिशन आगमन के तहत विक्रम-1 रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। यह रॉकेट पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में 350 किलोग्राम तक के छोटे उपग्रह पहुंचाने में सक्षम बनाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मिशन में रॉकेट को करीब 450 किलोमीटर की ऊंचाई वाली कक्षा तक भेजने का लक्ष्य रखा गया है।
स्काईरूट के इस मिशन को भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसरो के छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) और अन्य निजी कंपनियों के रॉकेट विकास कार्यक्रमों के साथ यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में और मजबूत होने की उम्मीद है।
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