जमानत मामलों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हाई कोर्ट को तय समयसीमा बनाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत मामलों में देरी पर चिंता जताते हुए हाई कोर्ट को निश्चित समयसीमा तय करने और मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए नई व्यवस्था लागू करने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के विभिन्न हाई कोर्ट में जमानत याचिकाओं की सुनवाई में हो रही लगातार देरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि लंबित मामलों की बढ़ती संख्या और अनियमित लिस्टिंग व्यवस्था के कारण न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सोमवार को “सनी चौहान बनाम पंजाब राज्य” मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। अदालत ने पहले देशभर के हाई कोर्ट से लंबित जमानत याचिकाओं का विस्तृत डेटा मांगा था।
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित जमानत मामलों की स्थिति पर चिंता जताई। अदालत ने सुझाव दिया कि हर जमानत याचिका के लिए सुनवाई की निश्चित तारीख तय की जाए। साथ ही “ज्यूडिशियल रिसोर्स एग्रीगेशन” प्रणाली अपनाने और दैनिक कॉज लिस्ट में जमानत मामलों को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
पीठ ने पटना हाई कोर्ट में भी लंबे समय तक जमानत मामलों के टलने का उल्लेख किया। वहीं मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक वर्ष पहले 63 हजार से अधिक लंबित जमानत याचिकाओं को “चिंताजनक स्थिति” बताया गया।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी अदालत की आलोचना करना नहीं बल्कि न्यायिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है।
अदालत ने हाई कोर्ट के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इनमें साप्ताहिक या पखवाड़ेवार सॉफ्टवेयर आधारित स्वचालित लिस्टिंग, पहली सुनवाई से पहले स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करना, एडवोकेट जनरल को जमानत याचिका की प्रति देना और नई याचिकाओं को एक सप्ताह के भीतर सूचीबद्ध करना शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन जमानत मामलों की सुनवाई नहीं हो पाती, उन्हें स्वतः दोबारा सूचीबद्ध किया जाए और सभी हाई कोर्ट जमानत मामलों के निपटारे के लिए अधिकतम समयसीमा तय करें।
इसके अलावा मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने “वन केस वन डेटा” डिजिटल पहल की घोषणा की, जिसके तहत देशभर की अदालतों का डेटा एकीकृत किया जाएगा ताकि न्यायिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सके।