राजा रघुवंशी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने सोनम की जमानत रद्द की, तीन हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर तीन हफ्ते में आत्मसमर्पण का आदेश दिया। कोर्ट ने देरी पर छह महीने बाद नई जमानत याचिका की अनुमति दी।
राजा रघुवंशी हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर दी। शीर्ष अदालत ने सोनम को तीन हफ्ते के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि यदि मुकदमे की सुनवाई में देरी होती है तो वह छह महीने बाद दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती हैं।
मामला मध्य प्रदेश के इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या से जुड़ा है। मई 2025 में राजा की कथित रूप से मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले में हत्या कर दी गई थी। वह अपनी पत्नी सोनम के साथ हनीमून पर मेघालय गए थे। आरोप है कि तीन सुपारी हत्यारों ने सोनम की मौजूदगी में राजा की हत्या को अंजाम दिया।
मेघालय सरकार ने सोनम को मिली जमानत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान सोनम के वकील ने कहा कि मामले में कुल 94 गवाह बनाए गए हैं, लेकिन अभी तक केवल चार गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं। उन्होंने बताया कि पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और सोनम को कड़ी शर्तों के साथ जमानत मिली थी।
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सोनम के वकील ने यह भी कहा कि वह जमानत की सभी शर्तों का पालन कर रही हैं और उनके फरार होने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सोनम ने आत्मसमर्पण नहीं किया था, बल्कि उन्हें उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था।
वहीं, मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आरोपी के आत्मसमर्पण को लेकर दिए गए तर्क गलत हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोपपत्र में दर्ज तथ्यों के अनुसार सोनम ने खुद आत्मसमर्पण किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करते हुए कहा कि बदलते समाज में नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि आज की पीढ़ी अधिक जानकारी रखती है, लेकिन दबाव से निपटने में अधिक संवेदनशील हो सकती है।
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