रील और पॉडकास्ट पर रोक की मांग सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई, अनुच्छेद 32 के राजनीतिक इस्तेमाल पर दी चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने रील और पॉडकास्ट पर रोक लगाने की याचिका खारिज करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल राजनीतिक मुद्दे खड़े करने के लिए नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर रील और पॉडकास्ट पर रोक लगाने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सर्वोच्च न्यायालय आने के अधिकार का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्य साधने के लिए नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ मोहम्मद अनस चौधरी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर द्वारा पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां ऑनलाइन प्रसारित किए जाने का मुद्दा उठाया गया था। याचिकाकर्ता ने ऐसे कंटेंट के प्रसार पर रोक लगाने और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रील तथा पॉडकास्ट के नियमन की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 32 नागरिकों को उनके मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का अधिकार देता है। हालांकि, इस संवैधानिक प्रावधान का उपयोग राजनीतिक या व्यापक नीतिगत बहसों को न्यायिक मंच पर लाने के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता।
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पीठ ने संकेत दिया कि यदि किसी व्यक्ति की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से कानून का उल्लंघन हुआ है, तो उसके लिए पहले से उपलब्ध कानूनी प्रक्रियाओं और संबंधित सक्षम प्राधिकारियों का सहारा लिया जा सकता है। केवल ऐसे मामलों के आधार पर पूरे सोशल मीडिया माध्यम या उसकी किसी विशेष सामग्री श्रेणी पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की मांग उचित नहीं मानी जा सकती।
अदालत ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग उनकी मूल भावना के अनुरूप होना चाहिए। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि संवैधानिक उपचारों का दुरुपयोग कर सार्वजनिक या राजनीतिक मुद्दों को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाने की प्रवृत्ति उचित नहीं है।
इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार करने से इनकार करते हुए अनुच्छेद 32 के दायरे और उसके उद्देश्य को एक बार फिर स्पष्ट किया।
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