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ट्रंप ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे का किया समर्थन, ईरान से दूर वैकल्पिक ऊर्जा मार्गों पर जोर

ट्रंप ने आईएमईसी का समर्थन करते हुए पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच ईरान से दूर वैकल्पिक ऊर्जा मार्गों की जरूरत बताई। उन्होंने ईरान पर दबाव और बातचीत दोनों जारी रखने की बात कही।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के लिए अपने प्रशासन का समर्थन जताया है। उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के बीच मध्य पूर्व की ऊर्जा आपूर्ति के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की जरूरत बताई।

ट्रंप ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) और अरब देशों के नेताओं के साथ बैठक में यह बात कही। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान से जुड़े हमलों ने मध्य पूर्व के ऊर्जा ढांचे को ईरानी नियंत्रण वाले मार्गों से दूर ले जाने की आवश्यकता को स्पष्ट किया है।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आईएमईसी का मजबूती से समर्थन करता है। उन्होंने तेल की आवाजाही के लिए पाइपलाइन और अन्य विकल्पों के विकास पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, ऐसे वैकल्पिक मार्ग क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।

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आईएमईसी क्या है?

भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे की घोषणा 2023 में की गई थी। इसका उद्देश्य भारत को खाड़ी क्षेत्र और यूरोप से जोड़ना है। प्रस्तावित गलियारे में भारत और अरब की खाड़ी के बीच पूर्वी मार्ग तथा खाड़ी क्षेत्र को यूरोप से जोड़ने वाला उत्तरी मार्ग शामिल है।

परियोजना में रेलवे और समुद्री संपर्क के साथ अन्य परिवहन सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इसका व्यापक उद्देश्य सामान की आवाजाही को आसान बनाना और भारत, मध्य पूर्व तथा यूरोप के बीच संपर्क बढ़ाना है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले कह चुके हैं कि भारत और यूरोप बड़े उत्पादन एवं उपभोग केंद्र हैं तथा ऐतिहासिक व्यापार मार्ग अरब प्रायद्वीप से होकर गुजरते रहे हैं।

ईरान को लेकर ट्रंप की चेतावनी

बैठक के दौरान ट्रंप ने ईरान पर आर्थिक दबाव जारी रखने की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग किया है और उम्मीद है कि तेहरान जल्द सही कदम उठाएगा।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा। साथ ही उन्होंने बताया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है और समझौते की उम्मीद बनी हुई है।

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