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संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदकों ने एसआईआर और एआई आधारित मतदाता सत्यापन प्रक्रिया पर जताई चिंता

संयुक्त राष्ट्र के तीन विशेष प्रतिवेदकों ने एसआईआर प्रक्रिया और एआई आधारित प्रणालियों पर चिंता जताते हुए भारत सरकार से अल्पसंख्यकों के मतदाता नाम हटाने संबंधी आरोपों पर जवाब मांगा है।

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के तीन विशेष प्रतिवेदकों (स्पेशल रैपोर्टियर्स) ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को लेकर चिंता व्यक्त की है। प्रतिवेदकों ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

1 मई 2026 को जारी इस संयुक्त संचार में विशेष प्रतिवेदकों ने भारत सरकार का ध्यान उन आरोपों की ओर आकर्षित किया है, जिनमें कहा गया है कि निर्वाचन आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के तहत लाखों नाम मतदाता सूची से हटाए गए। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस प्रक्रिया का प्रभाव विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय और अन्य अल्पसंख्यक समूहों पर पड़ा है।

रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण चिंता कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित प्रणालियों के कथित उपयोग को लेकर जताई गई है। प्रतिवेदकों का कहना है कि यदि मतदाता सत्यापन या नाम हटाने के लिए अपारदर्शी एआई मॉडल का उपयोग किया गया है, तो इससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उनका मानना है कि ऐसी प्रणालियों में प्रभावित लोगों के लिए प्रभावी अपील या सुधार का पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं होने की आशंका रहती है।

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संयुक्त राष्ट्र के जिन तीन विशेष प्रतिवेदकों ने यह चिंता व्यक्त की है, उनमें अल्पसंख्यक मुद्दों पर विशेष प्रतिवेदक, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के संवर्धन एवं संरक्षण पर विशेष प्रतिवेदक तथा धर्म या आस्था की स्वतंत्रता पर विशेष प्रतिवेदक शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार को इस संचार पर 60 दिनों के भीतर अपना आधिकारिक जवाब देने का अवसर दिया गया है। इस दौरान सरकार से एसआईआर प्रक्रिया, मतदाता सूची संशोधन, एआई के कथित उपयोग और अल्पसंख्यकों से जुड़े आरोपों पर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा गया है।

हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदकों द्वारा उठाई गई चिंताएं आरोपों और प्राप्त सूचनाओं पर आधारित हैं। इन पर भारत सरकार और भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है।

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