अमेरिका ने ईरान पर फिर किए हवाई हमले, होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले किए। होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर बढ़ते तनाव के बीच दोनों देशों के रिश्ते और अधिक तनावपूर्ण हो गए।
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान पर ताजा हवाई हमले करते हुए उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जिनके बारे में उसका दावा है कि उनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक और नौसैनिक जहाजों को खतरा पहुंचाने के लिए किया जा रहा था। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी देते हुए "सही व्यवहार" करने को कहा था।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार (स्थानीय समय) दोपहर 3 बजे अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ दूसरे चरण के हवाई हमले शुरू किए। सेंटकॉम के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य उन ईरानी सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन करने वाले जहाजों के लिए खतरा बन रही थीं।
हमलों के बाद ईरान ने दक्षिणी शहर अहवाज़ और चाबहार में जोरदार विस्फोटों की खबर दी। हालांकि, इन धमाकों का सीधा संबंध अमेरिकी कार्रवाई से है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इससे पहले भी बुधवार सुबह अमेरिकी सेना ने करीब 90 मिनट तक सैन्य अभियान चलाया था। सेंटकॉम के अनुसार, इस दौरान सटीक निर्देशित हथियारों का इस्तेमाल कर ग्रेटर तुंब द्वीप पर स्थित ईरान की तटीय रक्षा प्रणाली, क्रूज़ मिसाइल भंडारण केंद्र और लॉन्च साइटों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों से होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हमला करने की ईरान की क्षमता कमजोर हुई है।
इसी बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी भी दोबारा लागू कर दी है। यह कदम तेहरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कथित हमलों के जवाब में उठाया गया है।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, ताजा अमेरिकी हमलों में सेना की एक बैरक को निशाना बनाया गया, जिसमें कम से कम सात सैनिकों की मौत हो गई, जबकि देशभर में सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। लगातार हो रहे जवाबी हमलों के कारण दोनों देशों के बीच पहले हुआ अस्थायी युद्धविराम लगभग समाप्त हो चुका है। परमाणु कार्यक्रम को लेकर प्रस्तावित वार्ता भी ठप पड़ गई है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ता तनाव पूरे मध्य पूर्व को एक बार फिर व्यापक युद्ध की ओर धकेल सकता है।
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