अमेरिका-ईरान सैन्य तनाव थमने से तेल कीमतों में गिरावट, महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिली राहत की उम्मीद
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई रुकने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। इससे महंगाई पर राहत की उम्मीद जगी, लेकिन पश्चिम एशिया का तनाव अब भी चिंता बना हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच लगातार दूसरे दिन किसी नई सैन्य कार्रवाई के न होने से वैश्विक तेल बाजार को बड़ी राहत मिली है। रविवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं कुछ समय के लिए कम हो गईं।
वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 4.9 प्रतिशत गिरकर 92.02 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। इससे पहले शुक्रवार को भी इसमें लगभग 3.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि पिछले सप्ताह ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया था, जो मई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और व्यापक युद्ध की आशंकाओं ने तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव पैदा किया था।
विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी हुई है। ईरान के तट से गुजरने वाले इस समुद्री मार्ग से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल निर्यात की आवाजाही होती है। यदि यहां आपूर्ति प्रभावित होती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
और पढ़ें: केरल में मंत्री पद दिलाने के नाम पर 3 करोड़ रुपये की ठगी की साजिश, दिल्ली से दो आरोपी गिरफ्तार
तेल की बढ़ती कीमतों का असर ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत पर भी पड़ रहा है। अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत बढ़कर 4.11 डॉलर प्रति गैलन हो गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो महंगाई फिर तेज हो सकती है और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
हालांकि रविवार की गिरावट से बाजार को कुछ राहत मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है। यदि पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ता है या होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होती है तो तेल की कीमतों में दोबारा तेज उछाल आ सकता है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब क्षेत्रीय घटनाक्रम और केंद्रीय बैंकों की आगामी मौद्रिक नीतियों पर बनी रहेगी।
और पढ़ें: लंबित सेवा संबंधी मांगों को लेकर न्यायिक कर्मचारियों का सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला