क्या अमेरिका और इज़राइल इस सप्ताह ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला करेंगे? रिपोर्ट में बड़ा दावा
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका और इज़राइल ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की तैयारी में हैं। हालांकि, अंतिम मंजूरी पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के ऊर्जा और बिजली ढांचे पर संभावित सैन्य कार्रवाई की अटकलें तेज हो गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देश ईरान के बिजली संयंत्रों और ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाने की योजना पर समन्वय कर रहे हैं। हालांकि, इस संभावित अभियान को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी का इंतजार बताया जा रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस सैन्य अभियान को सोमवार से पहले पूरा करने की योजना बनाई जा रही है ताकि वैश्विक वित्तीय और ऊर्जा बाजारों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को सीमित रखा जा सके। बताया गया है कि इज़राइल को इस योजना की जानकारी दे दी गई है और वह अमेरिका के साथ समन्वय में है। हालांकि, इस संबंध में दोनों देशों की सरकारों की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
इस बीच, कैंप डेविड में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान पर "बहुत कड़ा प्रहार" करेगा और एक समय ऐसा आएगा जब ईरान आगे संघर्ष जारी रखने की स्थिति में नहीं रहेगा।
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यह तनाव उस घटना के बाद और बढ़ गया, जब तेहरान की ओर से जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने का दावा किया गया। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने इन मिसाइलों को समय रहते सफलतापूर्वक रोक लिया और अपने सैन्य ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित की।
दूसरी ओर, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे अमेरिका की कथित आक्रामक कार्रवाइयों के जवाब में उठाया गया कदम बताया। आईआरजीसी ने कहा कि जब तक ईरान के खिलाफ खतरे और अमेरिकी कार्रवाई जारी रहेगी, तब तक उसका प्रतिरोध भी जारी रहेगा।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिका इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों के खिलाफ भी सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। हालांकि, इन सभी संभावित अभियानों को लेकर अभी तक अमेरिका, इज़राइल या ईरान की ओर से कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
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