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अमेरिका ने ईरान पर समुद्री नाकाबंदी हटाई, मोजतबा खामेनेई बोले- समझौते के लिए बेताब थे ट्रंप

अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बहाल हो गई। मोजतबा खामेनेई ने दावा किया कि समझौते के लिए डोनाल्ड ट्रंप बेहद बेताब थे।

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से हुए शांति समझौते के बाद दोनों देशों के संबंधों में एक नया मोड़ आया है। समझौते के तहत अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास लागू अपनी समुद्री नाकाबंदी हटा दी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है।

समझौते के एक दिन बाद ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि ट्रंप समझौते को लेकर "बेहद बेताब" थे और इसे अंतिम रूप देने के लिए उन्होंने हर संभव दबाव और प्रभाव का इस्तेमाल किया।

राष्ट्र को संबोधित करते हुए खामेनेई ने कहा कि उन्होंने शुरुआत में इस समझौते का सिद्धांततः विरोध किया था। हालांकि बाद में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद से यह आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने इसे मंजूरी दी कि ईरान और "रेजिस्टेंस फ्रंट" के हित सुरक्षित रहेंगे।

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18 जून को ट्रंप और पेजेश्कियन ने आधिकारिक रूप से समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी वार्ताकार मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने प्रारंभिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए वेंस ने बताया कि अमेरिकी नौसेना ने एक दर्जन से अधिक जहाजों को ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचने की अनुमति दी है। उन्होंने कहा कि गुरुवार रात अकेले 1.25 करोड़ बैरल से अधिक तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरा।

समझौते के बाद प्रमुख वैश्विक शिपिंग कंपनियों ने भी इस मार्ग का इस्तेमाल फिर से शुरू कर दिया है। ईरान सरकार के अनुसार, देश के दक्षिणी बंदरगाहों पर जहाजरानी गतिविधियां सामान्य हो गई हैं। हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की निगरानी और नियंत्रण अब भी उसकी सेना के हाथों में है।

यह समझौता पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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