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अमेरिका ने 30 साल पुराने आतंकवादी निष्कासन न्यायालय का किया इस्तेमाल, आईएस समर्थक अफगान महिला के निर्वासन की तैयारी

अमेरिका ने तीन दशक से निष्क्रिय आतंकवादी निष्कासन न्यायालय को फिर सक्रिय किया है। आईएस समर्थक साजिश में कथित भूमिका वाली अफगान महिला नजीरा हाजी जादा के निर्वासन की प्रक्रिया शुरू हुई।

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने एक ऐसे विशेष न्यायालय का इस्तेमाल शुरू किया है, जो करीब 30 वर्षों से निष्क्रिय पड़ा था। इस न्यायालय के जरिए पहली बार एक अफगान महिला को देश से निर्वासित करने की कार्रवाई की जा रही है। महिला पर इस्लामिक स्टेट (आईएस) से प्रेरित आतंकी साजिश में सहयोग करने का आरोप है।

अदालती दस्तावेजों के अनुसार, टेक्सास के फोर्ट वर्थ की रहने वाली नजीरा हाजी जादा के निर्वासन के लिए सरकार ने एलियन टेररिस्ट रिमूवल कोर्ट में याचिका दायर की है। इस मामले में सुनवाई वॉशिंगटन डीसी में गुरुवार को होनी है। नजीरा को इसी सप्ताह गिरफ्तार किया गया था।

फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) के 15 जुलाई के एक ज्ञापन में कहा गया है कि जांच एजेंसी को ऐसी जानकारी मिली थी, जिसके अनुसार नजीरा इस्लामिक स्टेट की समर्थक है और उसने अपने बच्चों से आतंकी संगठन के प्रति निष्ठा की शपथ दिलाई थी। एफबीआई ने यह भी आरोप लगाया कि नजीरा ने अपने रिश्तेदारों द्वारा अमेरिका में आईएस से प्रेरित हमले की योजना में सहायता की।

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अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, नजीरा उन दो अफगान पुरुषों की मां और सास हैं, जिन्हें वर्ष 2024 के चुनाव दिवस पर हमले की साजिश में भूमिका के लिए ओक्लाहोमा में दोषी ठहराया गया था।

उनके बेटे अब्दुल्ला हाजी जादा को पिछले साल नवंबर में 15 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। वहीं, उनके दामाद नासिर अहमद तौहेदी ने इस्लामिक स्टेट को समर्थन देने की साजिश और आतंकी संगठन को मदद पहुंचाने के प्रयासों के आरोप स्वीकार किए थे। अभियोजकों के अनुसार, उसने एके-47 राइफल खरीदने, परिवार की संपत्ति बेचने और पत्नी-बच्चे के लिए अफगानिस्तान जाने की एकतरफा टिकट खरीदने जैसे कदम उठाए थे।

एलियन टेररिस्ट रिमूवल कोर्ट की स्थापना वर्ष 1996 में की गई थी, लेकिन इस महीने तक इसमें कभी कोई याचिका दाखिल नहीं हुई थी। यह विशेष अदालत न्याय विभाग द्वारा "विदेशी आतंकवादी" घोषित किए गए लोगों के निर्वासन मामलों की सुनवाई करती है।

यह अदालत देशभर के विभिन्न संघीय न्यायालयों के पांच न्यायाधीशों से मिलकर बनी है, जिनकी नियुक्ति अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश करते हैं।

कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने कहा कि यह अदालत उन विदेशी आतंकवादियों को अमेरिका से हटाने के लिए बनाई गई थी, जिन्हें देश में रहने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला आईएस समर्थक परिवार द्वारा अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाली बड़ी साजिश से जुड़ा है।

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