आर्थिक संघर्ष और आत्मविश्वास की लड़ाई पार कर एशियाई खेलों की टीम में पहुंचीं विदर्षा विनोद
विदर्षा विनोद ने आर्थिक कठिनाइयों, अकेले प्रशिक्षण और आत्म-संदेह से जूझते हुए भारतीय एशियाई खेल टीम में जगह बनाई। वह 10 मीटर एयर राइफल और 50 मीटर राइफल में उतरेंगी।
कोझिकोड की 27 वर्षीय निशानेबाज विदर्षा विनोद ने मुश्किल परिस्थितियों को पीछे छोड़कर एशियाई खेल 2026 के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई है। वह आइची-नागोया में 10 मीटर एयर राइफल और 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन स्पर्धाओं में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। हालांकि, उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा।
विदर्षा ने 2018 में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के जरिए पहली बार राइफल थामी थी। उस समय उनका उद्देश्य खेल को समझना और संभव हो तो सरकारी नौकरी का रास्ता तलाशना था। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली विदर्षा के लिए निशानेबाजी का खर्च उठाना मुश्किल था। इसलिए उन्होंने शुरुआत में उधार के उपकरणों से अभ्यास किया।
उनके जीवन में बड़ा बदलाव साथी निशानेबाज और बाद में पति बने मनु एस. रवि की सलाह से आया। मनु ने उन्हें अपनी राइफल खरीदने के लिए प्रेरित किया। परिवार ने 2021 में कर्ज लेकर उनकी पहली राइफल खरीदी। मनु के सहयोग और कोच मनोज कुमार के मार्गदर्शन में विदर्षा के प्रदर्शन में सुधार हुआ और 2022 में उन्होंने अपना पहला राष्ट्रीय पदक जीता।
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इसके बाद वह प्रशिक्षण के लिए दिल्ली स्थित डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज पहुंचीं। वहां उन्हें अकेले रहकर खाना बनाने, घर संभालने और रोजाना दो सत्रों में कठिन प्रशिक्षण लेने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि दिल्ली में अकेले रहना शारीरिक और मानसिक रूप से थका देने वाला था, लेकिन भारत के लिए खेलने के सपने के लिए उन्होंने संघर्ष जारी रखा।
2024 की शुरुआत में आर्थिक परेशानियों और लगातार नजदीकी हार के कारण उन्होंने निशानेबाजी छोड़ने तक का मन बना लिया था। लेकिन परिवार, पति और कोच के समर्थन ने उन्हें हिम्मत दी। बाद में उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में जगह मिली, जहां उपकरण, पोषण और प्रशिक्षण सुविधाओं की मदद मिली।
2025 एशियाई शूटिंग चैंपियनशिप में पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने के बाद उनका आत्मविश्वास और मजबूत हुआ। अब विदर्षा का लक्ष्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि दुनिया की नंबर एक निशानेबाज बनना है। उनका कहना है कि वह दूसरों से नहीं, बल्कि हर बार खुद से मुकाबला करती हैं।
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