डेमलर तमिलनाडु में करेगी 4,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश, भारत में कुल निवेश 14,500 करोड़ रुपये पहुंचेगा
डेमलर इंडिया कमर्शियल व्हीकल्स तमिलनाडु में 4,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करेगी। इससे भारत में कंपनी का कुल निवेश 14,500 करोड़ रुपये होगा और करीब 400 रोजगार पैदा होंगे।
डेमलर इंडिया कमर्शियल व्हीकल्स (डीआईसीवी) ने तमिलनाडु में लगभग 4,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करने का प्रस्ताव रखा है। इस निवेश के बाद भारत में कंपनी का कुल निवेश बढ़कर करीब 14,500 करोड़ रुपये हो जाएगा। कंपनी ने बताया कि प्रस्तावित निवेश भारत में भारतबेंज के विकास के अगले चरण का हिस्सा है।
कंपनी के अनुसार, यह अतिरिक्त निवेश उत्पाद विकास, विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास, बुनियादी ढांचे और भविष्य की तकनीकी जरूरतों को पूरा करने की तैयारी में किया जाएगा। प्रस्तावित अवधि के दौरान इससे लगभग 400 नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
डेमलर इंडिया कमर्शियल व्हीकल्स ने एक बयान में कहा कि यह निवेश भारत में उसके कारोबार के विस्तार और भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार रहने की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी अपने भारतबेंज ब्रांड के तहत वाणिज्यिक वाहनों का निर्माण और बिक्री करती है।
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तमिलनाडु लंबे समय से ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के प्रमुख केंद्रों में शामिल रहा है। राज्य में स्थापित औद्योगिक बुनियादी ढांचे और वाहन निर्माण से जुड़े मजबूत आपूर्ति तंत्र को देखते हुए यहां बड़े ऑटोमोबाइल निवेश लगातार आकर्षित हो रहे हैं।
डेमलर का प्रस्तावित निवेश कंपनी की उत्पादन क्षमता, अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों और नई तकनीकों से जुड़े काम को बढ़ावा दे सकता है। इसके अलावा, निवेश से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने और ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़े छोटे-बड़े कारोबारों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
कंपनी ने कहा कि भारत में वाणिज्यिक वाहन बाजार के भविष्य को ध्यान में रखते हुए वह अपने उत्पादों और तकनीकी क्षमताओं को लगातार मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। प्रस्तावित 4,000 करोड़ रुपये का निवेश इसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
नए निवेश के बाद भारत में डेमलर इंडिया कमर्शियल व्हीकल्स का कुल निवेश 14,500 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। कंपनी के मुताबिक, यह निवेश भारत में उसके कारोबार के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
प्रस्तावित परियोजना से करीब 400 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है। साथ ही विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।