नए मुक्त व्यापार समझौते भारत में वैश्विक सप्लाई चेन निवेश के लिए भरोसा बढ़ा रहे: वाणिज्य सचिव
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि पिछले पांच-छह वर्षों में हुए नए एफटीए भारत में वैश्विक सप्लाई चेन निवेश के लिए दीर्घकालिक निवेशकों का भरोसा बढ़ाते हैं।
भारत के पिछले पांच-छह वर्षों में अंतिम रूप दिए गए नए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) देश में वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़े दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देने के लिहाज से तैयार किए गए हैं। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को यह बात कही।
नई दिल्ली में पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया (पीएएफआई) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अग्रवाल ने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए आधुनिक एफटीए का उद्देश्य ऐसे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को भरोसा देना है, जो भारत में वैश्विक आपूर्ति शृंखला स्थापित करने या उसमें निवेश करने की योजना बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इन समझौतों की संरचना इस तरह की गई है कि भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का हिस्सा बनाने और यहां दीर्घकालिक निवेश आकर्षित करने में मदद मिले। वाणिज्य सचिव के अनुसार, एफटीए के माध्यम से भारत में निवेश करने वाली कंपनियों को देश में उत्पादन आधार स्थापित करने के साथ-साथ बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच का अवसर मिलता है।
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60 ट्रिलियन डॉलर के बाजार तक पहुंच
अग्रवाल ने कहा कि भारत द्वारा किए गए नए व्यापार समझौते निवेशकों को भारत में मौजूद रहते हुए करीब 60 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। ऐसे में भारत में उत्पादन या आपूर्ति शृंखला से जुड़ा निवेश करने वाली कंपनियों के लिए देश एक बड़े वैश्विक बाजार का आधार बन सकता है।
उन्होंने कहा कि पिछले पांच-छह वर्षों में हुए एफटीए पारंपरिक व्यापार समझौतों से अलग आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। इनमें बाजार पहुंच और व्यापार को सुगम बनाने के साथ दीर्घकालिक निवेशकों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा गया है।
भारत हाल के वर्षों में विभिन्न देशों और व्यापारिक समूहों के साथ एफटीए नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। सरकार इन समझौतों को भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार खोलने और देश को वैश्विक विनिर्माण एवं आपूर्ति शृंखलाओं से जोड़ने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देख रही है।
अग्रवाल की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत वैश्विक कंपनियों को देश में उत्पादन बढ़ाने और अपनी आपूर्ति शृंखलाओं में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए आकर्षित करने पर जोर दे रहा है।
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