भारत के आयात आंकड़ों में रूसी तेल की पहचान धुंधली, अनिर्दिष्ट शिपमेंट बढ़ने से तस्वीर बदली
भारत में रूसी तेल का स्पष्ट आयात घटा है, लेकिन अनिर्दिष्ट शिपमेंट बढ़ने से वास्तविक हिस्सेदारी कम दिख सकती है। खाड़ी आपूर्ति बढ़ने से बाजार में बदलाव दिखाई दे रहा है।
भारत में रूसी कच्चे तेल का आयात अगस्त में जुलाई की तुलना में 26 प्रतिशत घटकर 20.9 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। जुलाई में यह आंकड़ा 28.3 लाख बैरल प्रतिदिन था। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि आंकड़ों में गिरावट से रूसी तेल की वास्तविक हिस्सेदारी में कमी का पूरा अनुमान नहीं लगता।
कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के अनुसार, सितंबर में अब तक रूस से भारत आने वाला समुद्री कच्चा तेल करीब 19.5 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। अगस्त में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की स्पष्ट हिस्सेदारी 44 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 56 प्रतिशत थी।
विश्लेषक नवीन दास के मुताबिक, रूसी तेल बाजार से गायब नहीं हुआ है, बल्कि उसकी पहचान करना मुश्किल हुआ है। अगस्त में बिना घोषित गंतव्य वाले रूसी तेल शिपमेंट बढ़कर 8 लाख बैरल प्रतिदिन हो गए, जो जुलाई में 3 लाख बैरल थे। वहीं, भारत को अगस्त में करीब 5 लाख बैरल प्रतिदिन ऐसा कच्चा तेल मिला, जिसका स्रोत स्पष्ट नहीं था। सितंबर में यह मात्रा 6.4 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई।
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दूसरी ओर, खाड़ी देशों से भारत की आपूर्ति में सुधार हुआ है। अगस्त में खाड़ी से 11.8 लाख बैरल प्रतिदिन और सितंबर में अब तक 15.2 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आया। इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात से भी आपूर्ति बढ़ी है।
इस बीच, अमेरिकी कांग्रेस द्वारा रूस और ईरान से जुड़े 2026 के प्रतिबंध कानून को मंजूरी दिए जाने से बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। कानून के तहत रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिला है।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि रूसी तेल को बड़े पैमाने पर बदलना मुश्किल होगा। वैकल्पिक आपूर्ति की मांग बढ़ने पर वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल की आशंका भी जताई जा रही है।
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