सांकू बना लद्दाख का आठवां ज़िला, अलग पहाड़ी परिषद को भी मंजूरी
लद्दाख में सांकू को आठवें ज़िले का दर्जा दिया गया है और इसके साथ ही यहां एक अलग पहाड़ी परिषद के गठन को भी स्वीकृति मिली है।
लद्दाख क्षेत्र में सांकू को अब आधिकारिक तौर पर आठवें ज़िले के रूप में मान्यता दे दी गई है। इसके साथ ही सांकू के लिए एक अलग पहाड़ी परिषद गठित करने की घोषणा भी की गई है, जिससे इस क्षेत्र के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव आएगा।
सांकू को ज़िला बनाए जाने की मांग स्थानीय लोगों की ओर से लंबे समय से की जा रही थी। यह मांग वर्षों से लंबित थी और अब जाकर इसे पूरा किया गया है। स्थानीय निवासियों का मानना रहा है कि अलग ज़िले का दर्जा मिलने से क्षेत्र में प्रशासनिक कामकाज बेहतर तरीके से हो सकेगा और विकास कार्यों को गति मिलेगी।
लद्दाख पहले से ही एक केंद्र शासित प्रदेश है और समय-समय पर वहां प्रशासनिक पुनर्गठन की मांगें उठती रही हैं। सांकू को ज़िला बनाए जाने के साथ ही लद्दाख में कुल ज़िलों की संख्या आठ हो गई है। इस निर्णय से स्थानीय प्रशासन को क्षेत्रीय स्तर पर अधिक स्वायत्तता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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अलग पहाड़ी परिषद के गठन को भी इस फैसले का अहम हिस्सा माना जा रहा है। पहाड़ी परिषदें स्थानीय स्वशासन की संस्थाएं होती हैं, जो क्षेत्र के विकास, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सांकू के लिए अलग परिषद बनने से वहां के निवासियों को स्थानीय स्तर पर अपनी समस्याओं के समाधान हेतु एक स्वतंत्र मंच मिलेगा।
स्थानीय लोगों में इस फैसले को लेकर खुशी देखी जा रही है, क्योंकि यह उनकी वर्षों पुरानी मांग का परिणाम है। क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि इससे न केवल प्रशासनिक सुविधा बढ़ेगी, बल्कि सांकू क्षेत्र के समग्र विकास को भी बल मिलेगा। विशेष रूप से दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह निर्णय राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि अब उन्हें प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर स्थित ज़िला मुख्यालयों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
इस फैसले के बाद लद्दाख में प्रशासनिक पुनर्गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ती दिख रही है। आने वाले समय में सांकू ज़िले और इसकी नई पहाड़ी परिषद के कामकाज की रूपरेखा स्पष्ट होने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्र में शासन-प्रशासन और स्थानीय विकास को नई दिशा मिल सकेगी।
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