यूपीआई के 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर नहीं लगेगा बैंक चार्ज, रुपे डेबिट कार्ड भी शुल्क मुक्त
केंद्र सरकार ने 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन और रुपे डेबिट कार्ड भुगतान पर बैंक शुल्क रोक दिया है। अगस्त में यूपीआई लेनदेन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे।
केंद्र सरकार ने यूपीआई से 2,000 रुपये तक के लेनदेन और रुपे डेबिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतान पर बैंक और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं द्वारा शुल्क वसूलने पर रोक लगा दी है। वित्त मंत्रालय ने सोमवार, 14 सितंबर को भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन की अधिसूचना जारी की।
राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, रुपे आधारित डेबिट कार्ड और 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम के रूप में वर्गीकृत किया गया है। अधिनियम की धारा 10ए के तहत बैंक या भुगतान प्रणाली प्रदाता इन माध्यमों से भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं ले सकेंगे।
क्या होगा नए नियम का असर?
नए नियम से 2,000 रुपये तक के यूपीआई भुगतान पूरी तरह शुल्क मुक्त रहेंगे। साथ ही रुपे डेबिट कार्ड से किए गए भुगतान पर भी किसी तरह का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगाया जा सकेगा।
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हालांकि, 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर भविष्य में शुल्क लगाए जाने की संभावना बनी हुई है। फिलहाल यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू नहीं है। सरकार ने अगस्त में संकेत दिया था कि एक निश्चित सीमा से अधिक के चुनिंदा कारोबारी यूपीआई लेनदेन पर मामूली एमडीआर लागू करने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, उपभोक्ता और व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान को शुल्क मुक्त रखने की बात कही गई थी।
सरकार के अनुसार, यह बदलाव भारत के डिजिटल भुगतान ढांचे को टिकाऊ, प्रतिस्पर्धी और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप मजबूत बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
अगस्त में यूपीआई ने बनाया रिकॉर्ड
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में यूपीआई के जरिए रिकॉर्ड 24.51 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल कीमत 29.8 लाख करोड़ रुपये रही। जुलाई में 23.66 अरब लेनदेन हुए थे।
अगस्त में यूपीआई लेनदेन का मूल्य पिछले साल के इसी महीने के 24.85 लाख करोड़ रुपये से करीब 20 प्रतिशत अधिक रहा। वहीं, लेनदेन की संख्या सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़ी।
25 अगस्त 2016 को शुरू किए गए यूपीआई ने भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र को तेजी से बदल दिया है। वित्त वर्ष 2017 में यूपीआई लेनदेन का मूल्य 0.07 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर करीब 314 लाख करोड़ रुपये हो गया।
एनपीसीआई भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय बैंक संघ की पहल है तथा देश में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों के संचालन के लिए प्रमुख संस्था है।