7 करोड़ रुपये के डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी मामले में ईडी ने मुख्य आरोपी को किया गिरफ्तार
7 करोड़ रुपये के डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी मामले में ईडी ने अर्पित राठौर को गिरफ्तार किया। आरोपी पर मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर ठगी का आरोप है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जालंधर जोनल ऑफिस ने बुधवार को एक बड़े “डिजिटल अरेस्ट” साइबर ठगी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह मामला प्रसिद्ध उद्योगपति एसपी ओसवाल से 7 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़ा हुआ है। ईडी ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान अर्पित राठौर के रूप में हुई है। ईडी की जांच में सामने आया है कि ठगों के एक गिरोह ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर एसपी ओसवाल को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाया और उनसे 7 करोड़ रुपये की वसूली की। इसी गिरोह ने इसी तरह की साइबर ठगी के जरिए अन्य पीड़ितों से भी करीब 1.73 करोड़ रुपये ठगे।
जांच में यह भी पाया गया कि ठगी से हासिल रकम को 200 से अधिक म्यूल बैंक खातों के जरिए घुमाया गया। इन खातों का संचालन आरोपी रूमी कलिता और अर्पित राठौर कर रहे थे। तलाशी के दौरान ईडी अधिकारियों ने आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और करीब 14 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी जब्त की है।
यह जांच लुधियाना के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी, जो बीएनएसएस, 2023 के तहत दर्ज की गई थी। बाद में इसी सिंडिकेट से जुड़े नौ अन्य साइबर अपराध मामलों की एफआईआर को भी इस जांच में शामिल किया गया।
ईडी के अनुसार, आरोपी रूमी कलिता ने फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स और रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी संस्थाओं के खातों का इस्तेमाल अवैध धन को सफेद करने के लिए किया। वहीं अर्पित राठौर फंड ट्रांसफर का समन्वय करता था और उसके विदेशी सहयोगियों से भी संपर्क थे। ईडी ने बताया कि अर्पित राठौर को उसकी हिस्सेदारी क्रिप्टोकरेंसी (USDT) और नकद में मिली।
इससे पहले रूमी कलिता को 23 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और वह अभी ईडी की हिरासत में है। अर्पित राठौर को 5 जनवरी 2026 तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है।
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