मानसून का बदला मिजाज: राजस्थान में झमाझम बारिश, मुंबई में सूखे जैसे हालात ने बढ़ाई चिंता
इस वर्ष मानसून का पैटर्न असामान्य है। राजस्थान में सामान्य से अधिक बारिश हुई है, जबकि मुंबई समेत कई क्षेत्रों में कम वर्षा दर्ज होने से चिंता बढ़ गई है।
इस वर्ष देश में मानसून का व्यवहार मौसम वैज्ञानिकों और किसानों दोनों के लिए हैरानी का कारण बन गया है। आमतौर पर जहां कम बारिश होती है, वहां इस बार सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की जा रही है, जबकि जिन क्षेत्रों में मानसून के दौरान अच्छी बारिश की उम्मीद रहती है, वहां सूखे जैसे हालात देखने को मिल रहे हैं।
सबसे दिलचस्प स्थिति राजस्थान और महाराष्ट्र में देखने को मिल रही है। सामान्यतः जून महीने में राजस्थान में सीमित वर्षा होती है, लेकिन इस बार राज्य के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। दूसरी ओर, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और महाराष्ट्र के कई इलाके अब तक मानसूनी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में अब तक देश में औसतन 46 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। जबकि पिछले वर्षों में इसी अवधि तक औसतन 84.4 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की जाती रही है। इस तरह देश में अब तक लगभग 46 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जो कृषि और जल संसाधनों के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के इस असामान्य व्यवहार के पीछे कई मौसमीय कारण हो सकते हैं। इनमें अल-नीनो प्रभाव, समुद्री तापमान में बदलाव, वायुमंडलीय दबाव की स्थिति और सोमाली जेट की कमजोरी जैसे कारक शामिल हो सकते हैं। हालांकि मौसम वैज्ञानिक अभी इन कारणों का विस्तृत विश्लेषण कर रहे हैं।
मानसून की अनियमितता का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ सकता है, क्योंकि खेती काफी हद तक समय पर होने वाली बारिश पर निर्भर करती है। यदि आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो कई राज्यों में फसलों और जल भंडारण पर असर पड़ सकता है।
फिलहाल मौसम विशेषज्ञों की नजर दक्षिण-पश्चिम मानसून की आगे की गतिविधियों पर बनी हुई है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में बारिश की रफ्तार बढ़ सकती है।
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