पीएम-कुसुम के अगले चरण की रूपरेखा पर प्रह्लाद जोशी ने की समीक्षा बैठक
प्रह्लाद जोशी ने पीएम-कुसुम के अगले चरण पर बैठक में एग्रीवोल्टिक्स, 27 लाख सोलर पंपों, 15.8 गीगावाट नवीकरणीय क्षमता और घरेलू सौर विनिर्माण को बढ़ावा देने पर चर्चा की।
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पीएम-कुसुम योजना के अगले चरण के लिए रोडमैप तैयार करने को लेकर मंत्रालय के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में योजना के आगामी चरण में कृषि और सौर ऊर्जा के समन्वित उपयोग, जिसे एग्रीवोल्टिक्स कहा जाता है, को और अधिक बढ़ावा देने की रणनीति पर चर्चा की गई।
प्रह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए कहा कि योजना के अगले चरण को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाने के लिए विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। एग्रीवोल्टिक्स के जरिए एक ही भूमि पर कृषि गतिविधियों और सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की संभावना है, जिससे किसानों को अतिरिक्त लाभ मिल सकता है।
मंत्री ने बताया कि पीएम-कुसुम योजना के तहत देश में अब तक 27 लाख से अधिक पंपों का सोलराइजेशन किया जा चुका है। इस पहल ने कृषि क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ ही डीजल पर निर्भरता कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से अब तक 15.8 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी जा चुकी है। इसके परिणामस्वरूप हर वर्ष लगभग 80.6 करोड़ लीटर डीजल की बचत हो रही है। इससे न केवल किसानों की ऊर्जा लागत में कमी आने की संभावना है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन घटाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूती मिल रही है।
बैठक में देश में पॉलीसिलिकॉन विनिर्माण की दिशा और घरेलू सौर विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार किया गया। सरकार एक मजबूत और पूरी तरह एकीकृत घरेलू सौर विनिर्माण इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि भारत सौर उपकरणों के उत्पादन में अधिक आत्मनिर्भर बन सके।
पीएम-कुसुम योजना के अगले चरण में स्वच्छ ऊर्जा, कृषि क्षेत्र की जरूरतों और घरेलू विनिर्माण को जोड़ते हुए नई रणनीति तैयार किए जाने पर जोर दिया गया।
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