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तीसरी भाषा कक्षा 9 में लागू न करें, इससे बढ़ेगा छात्रों का तनाव: सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को सलाह

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को कक्षा 9 में तीसरी भाषा लागू नहीं करने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि इससे छात्रों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और इसे कक्षा 6 से शुरू किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को कक्षा 9 में तीसरी भाषा लागू करने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की सलाह दी है। अदालत ने कहा कि नौवीं कक्षा में अतिरिक्त भाषा जोड़ने से छात्रों पर अनावश्यक मानसिक दबाव बढ़ेगा।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ने सीबीएसई की नई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि तीसरी भाषा को अनिवार्य बनाना है तो इसकी शुरुआत कक्षा 6 से होनी चाहिए, न कि कक्षा 9 से। उन्होंने कहा कि नौवीं कक्षा पहले से ही छात्रों के लिए महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण होती है, ऐसे में अतिरिक्त भाषा का बोझ उनके तनाव को बढ़ा सकता है।

इससे पहले सीबीएसई ने तीसरी भाषा (आर3) के मूल्यांकन को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया था। बोर्ड के अनुसार, वर्ष 2027-28 से कक्षा 10 का उत्तीर्ण प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए छात्रों को तीसरी भाषा का स्कूल स्तर पर आंतरिक मूल्यांकन पास करना होगा। हालांकि, इस विषय की कोई अलग सीबीएसई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। यदि कोई छात्र आंतरिक मूल्यांकन में सफल नहीं होता है, तो उसे स्कूल द्वारा पुनर्मूल्यांकन का अवसर दिया जाएगा।

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सीबीएसई ने 29 जून को जारी दिशा-निर्देशों में कहा था कि छात्रों द्वारा चुनी गई तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। तीसरी भाषा के रूप में कोई गैर-भारतीय या विदेशी भाषा चुनी जा सकती है, बशर्ते अन्य दो भाषाएं भारतीय हों।

सीबीएसई के अनुसार, वर्ष 2026-27 में कक्षा 10 में पढ़ रहे छात्रों पर यह नई व्यवस्था लागू नहीं होगी और वे पहले की तरह केवल दो भाषाओं का अध्ययन करेंगे। वहीं, इसी सत्र में कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम एक भारतीय भाषा होगी।

भारतीय भाषाओं में हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती, ओड़िया, असमिया सहित संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य भाषाएं हैं। जबकि अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी और स्पेनिश जैसी भाषाएं गैर-भारतीय भाषाओं की श्रेणी में आती हैं।

सीबीएसई की नई त्रिभाषा नीति के तहत भाषा विषयों को आर1, आर2 और आर3 श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इस नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू करते हुए वर्ष 2030-31 तक कक्षा 10 तक पूरी तरह प्रभावी बनाने की योजना है।

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