मक्का समझौते में शामिल हो सकता है बांग्लादेश? विदेश राज्य मंत्री के बयान से तेज हुई अटकलें
बांग्लादेश ने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में शामिल होने को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। हालांकि, ढाका को अभी औपचारिक निमंत्रण नहीं मिला है।
बांग्लादेश ने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में शामिल होने की संभावना पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। ढाका का कहना है कि अगर उसे इस समझौते में शामिल होने का निमंत्रण मिलता है, तो वह उस पर गंभीरता से विचार करेगा। हालांकि, बांग्लादेश को अभी तक औपचारिक निमंत्रण नहीं मिला है।
विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि इस समझौते में शामिल होने से बांग्लादेश के दूसरे देशों के साथ संबंध या सहयोग सीमित नहीं होंगे। उन्होंने इसे नई संभावनाएं पैदा करने वाला समझौता बताया और कहा कि बदलते वैश्विक हालात में ढाका अपनी विदेश नीति को लचीला बनाए रखेगा।
कबीर ने बताया कि इस मुद्दे पर बांग्लादेश अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से बातचीत कर रहा है और अब तक मिली प्रतिक्रियाएं सकारात्मक रही हैं। उन्होंने सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ हुई बातचीत का भी उल्लेख किया।
और पढ़ें: बांग्लादेश में हिंदू परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध मौत, बंद घर से मिले शव
विदेश मंत्री खलीलुर रहमान भी संसद में कह चुके हैं कि बांग्लादेश इस समझौते को सकारात्मक नजरिए से देखता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि देश को अभी तक इसमें शामिल होने का प्रस्ताव नहीं मिला है।
क्या है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता?
यह समझौता 7 अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुआ था। इसका उद्देश्य किसी सदस्य देश पर होने वाले सशस्त्र हमले के खिलाफ सामूहिक सुरक्षा और प्रतिरोध क्षमता मजबूत करना है। समझौते के तहत एक सदस्य पर हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा।
बांग्लादेश में बढ़ी बहस
पूर्व राजनयिकों और विशेषज्ञों के बीच समझौते में शामिल होने को लेकर मतभेद हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश की पारंपरिक गुटनिरपेक्ष नीति और राष्ट्रीय हितों को देखते हुए सैन्य गठबंधन में शामिल होने से पहले सावधानी जरूरी है।
वहीं, समर्थकों का कहना है कि सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के साथ सुरक्षा सहयोग से बांग्लादेश की रणनीतिक स्थिति और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत हो सकती है। अब नजर इस बात पर है कि ढाका को औपचारिक निमंत्रण कब मिलता है और वह क्या फैसला करता है।
और पढ़ें: मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बने बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति, 35 साल बाद हुआ बहुकोणीय चुनाव