नियंत्रित अमेरिका–चीन प्रतिस्पर्धा से ही वैश्विक स्थिरता संभव: गर्गाश
अनवर गर्गाश ने कहा कि नियंत्रित अमेरिका–चीन प्रतिस्पर्धा वैश्विक स्थिरता की कुंजी है, जबकि पश्चिम एशिया में शांति के लिए फिलिस्तीनी मुद्दे का राजनीतिक समाधान जरूरी है।
दुबई में आयोजित वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट में संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के कूटनीतिक सलाहकार अनवर गर्गाश ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच संबंध वैश्विक स्थिरता का अहम पैमाना हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि इन संबंधों को “नियंत्रित प्रतिस्पर्धा” के माध्यम से संभाला जाए, तो यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्थिरता का कारक बन सकता है। गर्गाश के अनुसार, सावधानीपूर्वक प्रबंधन से अमेरिका–चीन संबंध न केवल टकराव को रोक सकते हैं, बल्कि वैश्विक संतुलन को भी मजबूत कर सकते हैं।
उन्होंने परमाणु हथियार नियंत्रण की निरंतर प्रासंगिकता पर भी बल दिया और कहा कि इस विषय पर नए सिरे से संवाद और समझौतों की आवश्यकता है। गर्गाश ने स्पष्ट किया कि 1970 और 1980 के दशकों में विकसित ढांचे आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं और बदलते वैश्विक परिदृश्य में उनका महत्व बना हुआ है।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर बोलते हुए गर्गाश ने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए फिलिस्तीनी मुद्दे का समाधान अनिवार्य है। उन्होंने दोहराया कि यह समाधान केवल राजनीतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ही संभव है, न कि टकराव या सैन्य उपायों से। उनके अनुसार, अनुभव ने बार-बार यह साबित किया है कि राजनीतिक रास्ता ही टिकाऊ समाधान देता है।
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गाजा में यूएई की संभावित नागरिक प्रशासनिक भूमिका को लेकर चल रही अटकलों को गर्गाश ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यूएई इस तरह की किसी भूमिका पर विचार नहीं कर रहा है, हालांकि मानवीय सहायता के क्षेत्र में उसकी सक्रिय भागीदारी जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में गाजा को मिलने वाली कुल सहायता का लगभग 45 प्रतिशत योगदान यूएई ने दिया है।
गर्गाश ने कहा कि गाजा में भविष्य की किसी भी भूमिका के लिए फिलिस्तीनियों, मिस्र, इजरायल और जॉर्डन के साथ घनिष्ठ समन्वय जरूरी होगा, जिसमें अमेरिका की मजबूत नेतृत्वकारी भूमिका केंद्रीय होगी। तुर्किये द्वारा गाजा में बल तैनात करने के सुझाव पर उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी पक्षों की व्यापक सहमति आवश्यक है। अंत में, उन्होंने बदलती वैश्विक व्यवस्था में बहुपक्षीय संबंधों के महत्व को रेखांकित करते हुए अमेरिका जैसे सहयोगियों के साथ ठोस और भरोसेमंद साझेदारी को यूएई के लिए आवश्यक बताया।
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