×
 

इसरो में कैसे बनें वैज्ञानिक? जानिए भर्ती प्रक्रिया, सैलरी, काम का समय और इस्तीफे के नए नियम

इसरो में वैज्ञानिक बनने की योग्यता, भर्ती प्रक्रिया, वेतन, कार्य समय और इस्तीफे के नए नियम सामने आए हैं। सरकार ने महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर सख्ती बढ़ाई है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में वैज्ञानिक बनना देश के लाखों युवाओं का सपना होता है। चंद्रयान, आदित्य-एल1 और गगनयान जैसे महत्वाकांक्षी मिशनों की सफलता के पीछे इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की कड़ी मेहनत रही है। हालांकि, हाल के महीनों में बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों के इस्तीफे देने की खबरों के बाद सरकार ने इस्तीफों से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है।

रिपोर्टों के अनुसार, हाल के महीनों में लगभग 100 से 120 वैज्ञानिकों ने इसरो छोड़ा है। इनमें यू. आर. राव सैटेलाइट सेंटर और विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के कई अनुभवी वैज्ञानिक शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें कुछ अधिकारी गगनयान, चंद्रयान-3 और अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं से भी जुड़े रहे हैं। इसे देखते हुए अंतरिक्ष विभाग ने 14 जुलाई को नया आंतरिक निर्देश जारी किया है। अब गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजनाओं पर कार्यरत ग्रुप-ए वैज्ञानिकों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) को सामान्य प्रक्रिया के तहत मंजूरी नहीं दी जाएगी। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय केंद्र स्तर पर लिया जाएगा।

अगर आप इसरो में वैज्ञानिक या इंजीनियर बनना चाहते हैं, तो 12वीं कक्षा में भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित विषय होना आवश्यक है। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, सिविल, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग या भौतिकी जैसे विषयों में बीई, बीटेक या समकक्ष डिग्री करनी होती है। इसरो सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड समय-समय पर वैज्ञानिक एवं इंजीनियर पदों के लिए भर्ती करता है। चयन लिखित परीक्षा, साक्षात्कार और दस्तावेज़ सत्यापन के आधार पर होता है। भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएसटी) के छात्रों को भी इसरो में अवसर मिलने की संभावना अधिक रहती है।

और पढ़ें: बिम्सटेक बैठक में अजीत डोभाल ने रखा भारत का सुरक्षा विजन, नेबरहुड फर्स्ट और एक्ट ईस्ट नीति पर दिया जोर

इसरो में वैज्ञानिकों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार पे-लेवल 10 के तहत शुरुआती 56,100 रुपये मूल वेतन मिलता है। महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, परिवहन भत्ता, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) सहित अन्य सुविधाओं को जोड़ने पर मासिक वेतन लगभग 95 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये या उससे अधिक हो सकता है।

इसरो में सामान्य कार्य समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक रहता है। सप्ताह में पांच दिन काम और दो दिन अवकाश मिलता है। हालांकि, मिशन की आवश्यकता के अनुसार वैज्ञानिकों को अतिरिक्त समय तक भी काम करना पड़ सकता है। संस्थान में अनुसंधान आधारित वातावरण, आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं, परिवहन और अन्य कर्मचारी लाभ उपलब्ध कराए जाते हैं। सुरक्षा कारणों से कई परिसरों में मोबाइल फोन ले जाने पर भी प्रतिबंध रहता है।

और पढ़ें: न्यूज़ीलैंड में 6.3 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, सुनामी की चेतावनी जारी

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share