होर्मुज़ संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, फिर भी 100 डॉलर के ऊपर बनी रहीं दरें
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में राहत संकेतों से कच्चे तेल की कीमतों में करीब 3% गिरावट आई, लेकिन अनिश्चितता के कारण दरें अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।
वैश्विक बाजारों में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट उस समय आई जब अमेरिका की ओर से होर्मुज़ जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों की आवाजाही को सुगम बनाने के संकेत मिले। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच किसी ठोस समझौते की कमी के कारण कीमतें अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 66 सेंट गिरकर 107.51 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) में 2.83 डॉलर की गिरावट आई और यह 99.11 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
घरेलू बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर कच्चे तेल के वायदा भाव 44 रुपये की गिरावट के साथ 9,621 रुपये पर कारोबार कर रहे थे।
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इस गिरावट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान को अहम माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका होर्मुज़ जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए कदम उठाएगा। इससे बाजार में राहत की उम्मीद जगी है।
हालांकि, इस क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है और यहां किसी भी बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है।
इस बीच, ओपेक प्लस (OPEC+) देशों ने जून में उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की है। सात सदस्य देश मिलकर प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन करेंगे।
शेयर बाजारों में भी सकारात्मक असर देखने को मिला, जहां सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। एशियाई बाजारों में भी मजबूती रही।
फिलहाल, होर्मुज़ क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।
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