ईंधन संकट के बीच पाकिस्तान के मंत्री का खुलासा, कहा- भारत जैसी रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता नहीं
पाकिस्तान के मंत्री ने स्वीकार किया कि देश के पास भारत जैसी तेल भंडारण क्षमता नहीं है, जिससे ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच गंभीर ईंधन संकट पैदा हो गया है।
पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि देश के पास भारत जैसी रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता नहीं है, जिसके कारण मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच पाकिस्तान गंभीर ईंधन संकट का सामना कर रहा है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव और युद्ध जैसी स्थिति का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ रहा है। एक साक्षात्कार में मंत्री ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान के पास एक दिन के लिए भी पर्याप्त रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद नहीं है।
उन्होंने भारत की तुलना करते हुए कहा कि भारत न केवल बड़े पैमाने पर आर्थिक भंडार रखता है, बल्कि रणनीतिक तेल भंडार भी बनाए रखता है, जिससे वह किसी भी संकट का सामना बेहतर तरीके से कर सकता है। मंत्री ने कहा कि भारत ने बढ़ते तेल संकट के दौरान कर नीति में बदलाव कर अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षा कवच प्रदान किया, जबकि पाकिस्तान आईएमएफ कार्यक्रम और उसकी शर्तों के कारण सीमित दायरे में है।
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उन्होंने कहा कि मौजूदा आर्थिक स्थिति में पाकिस्तान के पास ऐसी वित्तीय स्वतंत्रता नहीं है, जिससे वह बड़े फैसले ले सके।
इस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी स्वीकार किया है कि खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध का देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, हालांकि उन्होंने सऊदी अरब के सहयोग से स्थिति संभालने की बात कही।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह स्वीकारोक्ति उसकी आर्थिक अस्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा में कमजोरी को उजागर करती है।
उधर, अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच पाकिस्तान को मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में उसकी भूमिका पर सवाल भी उठाए गए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने दक्षिण एशिया और मध्य-पूर्व की भू-राजनीति में पाकिस्तान की स्थिति को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
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