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सऊदी अरब की अबकैक रिफाइनरी में ड्रोन हमले के बाद भीषण आग, वैश्विक तेल आपूर्ति पर बढ़ी चिंता

इराक से किए गए कथित ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब की अबकैक रिफाइनरी में भीषण आग लग गई। घटना से वैश्विक तेल आपूर्ति और पश्चिम एशिया की सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको की अबकैक रिफाइनरी में कथित ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई। इस घटना ने वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं, क्योंकि यह रिफाइनरी दुनिया के सबसे बड़े तेल प्रसंस्करण केंद्रों में से एक मानी जाती है।

सोशल मीडिया और ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (ओएसआईएनटी) प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए कई वीडियो और उपग्रह चित्रों में रिफाइनरी और ईस्ट-वेस्ट पंपिंग स्टेशन से धुएं का बड़ा गुबार उठता दिखाई दे रहा है। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

अबकैक रिफाइनरी दुनिया का सबसे बड़ा कच्चे तेल का स्थिरीकरण संयंत्र है। यहां कच्चे तेल से हाइड्रोजन सल्फाइड, प्राकृतिक गैस तरल, पानी और अन्य अशुद्धियों को अलग किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संयंत्र पर किसी भी प्रकार का हमला वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

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घटना के बाद सऊदी अरामको की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। साथ ही, हमले में किसी के हताहत होने की भी पुष्टि नहीं हुई है।

सऊदी अरब ने दावा किया है कि ड्रोन इराक की सीमा से ईरान समर्थित उग्रवादी संगठनों द्वारा दागे गए थे। इनका निशाना पूर्वी क्षेत्र के तेल प्रतिष्ठान और राजधानी रियाद थे। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने कहा कि यह हमला ईरान समर्थित आतंकवादी गुटों ने किया और सऊदी अरब को अपनी सुरक्षा तथा हितों की रक्षा के लिए उचित समय और स्थान पर जवाब देने का पूरा अधिकार है।

उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी से अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बाद सऊदी अरब पर कई बार ड्रोन और मिसाइल हमले हो चुके हैं। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही भी लगातार सऊदी अरब के तेल ठिकानों और बंदरगाहों को निशाना बना रहे हैं। हूती संगठन के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि उनके लड़ाकों ने सऊदी अरब के लिए काम कर रहे तुर्की निर्मित एक सशस्त्र टोही ड्रोन को भी मार गिराया है। इन घटनाओं ने पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।

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