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यूएई से अलगाववादियों को हथियार भेजे जाने के आरोप में सऊदी अरब ने यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर बमबारी की

सऊदी अरब ने यूएई से अलगाववादियों को हथियार भेजे जाने के आरोप में यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर हवाई हमला किया, जिससे सऊदी-यूएई संबंधों और यमन संघर्ष में तनाव बढ़ गया।

सऊदी अरब ने मंगलवार (30 दिसंबर 2025) को यमन के बंदरगाह शहर मुकल्ला पर हवाई हमले किए। सऊदी अरब का कहना है कि यहां संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से आए जहाजों के जरिए एक अलगाववादी संगठन के लिए हथियारों की खेप पहुंचाई गई थी। इस कार्रवाई को यमन में चल रहे संघर्ष के बीच सऊदी अरब और यूएई समर्थित गुटों के बीच बढ़ते तनाव के रूप में देखा जा रहा है।

सऊदी के सैन्य बयान में कहा गया कि फुजैराह से आए जहाजों के मुकल्ला बंदरगाह पर पहुंचने के बाद यह हवाई हमला किया गया। बयान में कहा गया कि इन हथियारों से क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को गंभीर खतरा था, इसलिए गठबंधन वायुसेना ने सीमित सैन्य अभियान के तहत बंदरगाह पर उतारे गए हथियारों और लड़ाकू वाहनों को निशाना बनाया।

मुकल्ला यमन के हद्रामौत प्रांत में स्थित है, जिस पर हाल के दिनों में यूएई समर्थित सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी) ने कब्जा कर लिया था। यह शहर अदन से करीब 480 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है, जो 2014 में हूती विद्रोहियों द्वारा राजधानी सना पर कब्जे के बाद से हूती-विरोधी ताकतों का केंद्र रहा है।

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यह हमला ऐसे समय हुआ है जब सऊदी अरब ने इससे पहले 26 दिसंबर को भी एसटीसी पर हवाई हमले किए थे। विश्लेषकों के अनुसार, ये हमले अलगाववादियों को हद्रामौत और महरा प्रांतों से पीछे हटने की चेतावनी थी। एसटीसी ने वहां सऊदी समर्थित नेशनल शील्ड फोर्सेज को हटाया था।

एसटीसी समर्थक लगातार दक्षिण यमन का झंडा लहरा रहे हैं और 1967 से 1990 तक अलग देश रहे दक्षिण यमन को फिर से अलग करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इन घटनाओं से सऊदी अरब और यूएई के रिश्तों पर दबाव बढ़ा है। दोनों देश ओपेक के सदस्य और करीबी सहयोगी हैं, लेकिन यमन और सूडान जैसे क्षेत्रों में उनके हित टकरा रहे हैं।

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