नैतिक उल्लंघन के आरोप में थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा पद से बर्खास्त
थाई अदालत ने प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा को नैतिक उल्लंघन के आरोप में पद से हटाया। कंबोडिया कॉल विवाद के बाद वे 17 वर्षों में पदच्युत होने वाली पाँचवीं प्रधानमंत्री बनीं।
थाईलैंड की संवैधानिक अदालत ने प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा को नैतिक आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में पद से हटा दिया है। अदालत का कहना है कि शिनावात्रा ने एक महत्वपूर्ण सरकारी निर्णय के दौरान राष्ट्रीय हितों के बजाय निजी हितों को प्राथमिकता दी।
मामला कंबोडिया के प्रधानमंत्री के साथ की गई एक विवादित टेलीफोन कॉल से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि इस कॉल के दौरान शिनावात्रा ने ऐसा आचरण किया जिससे यह संकेत मिला कि उन्होंने देश के बजाय निजी और राजनीतिक लाभ को महत्व दिया।
पैतोंगटार्न शिनावात्रा पूर्व प्रधानमंत्री थक्सिन शिनावात्रा की बेटी हैं और पद से हटाए जाने के साथ ही वे पिछले 17 वर्षों में पदच्युत होने वाली थाईलैंड की पाँचवीं प्रधानमंत्री बन गई हैं। अदालत के इस फैसले से देश में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ सकती है।
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राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला थाईलैंड की लोकतांत्रिक प्रणाली में न्यायपालिका की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। विपक्षी दलों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है, जबकि शिनावात्रा के समर्थक इसे राजनीतिक षड्यंत्र बता रहे हैं।
शिनावात्रा सरकार की कई नीतियों, खासकर आर्थिक सुधारों और विदेश नीति से जुड़े निर्णयों को लेकर पहले से ही विवादों में रही थीं। उनके इस्तीफे या बर्खास्तगी की अटकलें लंबे समय से लगाई जा रही थीं।
अब थाईलैंड में अस्थायी प्रधानमंत्री की नियुक्ति तक राजनीतिक अनिश्चितता बनी रहने की संभावना है।
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