व्यापार, तकनीक, एआई और सैन्य संबंधों पर होगी ट्रंप-शी जिनपिंग की बातचीत
ट्रंप और शी जिनपिंग की बैठक में व्यापार, शुल्क, एआई, तकनीक, सैन्य संबंध, ताइवान, रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व समेत कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली बातचीत में व्यापार, शुल्क, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सैन्य संबंधों और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दे शामिल होने की उम्मीद है। मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध, अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ और ताइवान को अमेरिका की हथियार बिक्री भी चर्चा का हिस्सा बन सकती है।
शी जिनपिंग बुधवार को तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर अमेरिका पहुंचे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने मैरीलैंड स्थित ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर चीनी राष्ट्रपति और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का स्वागत किया। शी का विमान स्थानीय समयानुसार शाम 5:39 बजे वहां पहुंचा। यह छह महीने से भी कम समय में ट्रंप और शी की दूसरी शिखर बैठक है।
1962 के बाद पहली बार एयरपोर्ट पर स्वागत
शी के स्वागत को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 1962 के बाद पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने एयरपोर्ट पर किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया। उस समय तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री हेरोल्ड मैकमिलन का स्वागत किया था।
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व्यापार और तकनीक पर खास नजर
बातचीत में अमेरिका-चीन व्यापार संबंध, शुल्क, महत्वपूर्ण खनिज, तकनीक और एआई प्रमुख मुद्दे रह सकते हैं। दोनों देश रणनीतिक तकनीकों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर भी कई मतभेद रखते हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका और चीन के संबंध 21वीं सदी को प्रभावित करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर गंभीर मतभेद हैं, लेकिन शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत नहीं होना गैर-जिम्मेदाराना होगा।
चीन-अमेरिका को साझेदार बनना चाहिए: शी
अमेरिका पहुंचने के बाद शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देश नई परिस्थितियों में एक-दूसरे के साथ संबंधों का सही रास्ता तलाश सकते हैं।
शी ने कहा कि दोनों देशों को सहयोग को प्रमुख आधार बनाकर स्थिर संबंधों को बढ़ावा देना चाहिए और मतभेदों को नियंत्रित तरीके से संभालना चाहिए।
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