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डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की से लौटते समय बदला विमान, कतर से मिले नए एयर फोर्स वन की जगह पुराने विमान से क्यों भरी उड़ान?

डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो शिखर सम्मेलन के बाद कतर से मिले नए विमान की जगह पुराने एयर फोर्स वन से वापसी की। फैसले के पीछे सुरक्षा चिंताओं और ईरान तनाव को कारण माना जा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो शिखर सम्मेलन के बाद तुर्की से अमेरिका लौटते समय ऐसा फैसला लिया, जिसने दुनियाभर में चर्चा छेड़ दी। ट्रंप जिस नए बोइंग 747-8 विमान से तुर्की पहुंचे थे, उससे वापस नहीं लौटे। इसके बजाय उन्होंने पुराने एयर फोर्स वन VC-25A विमान से अमेरिका की यात्रा की।

कतर द्वारा उपहार में दिए गए नए विमान को अलग से रॉयल एयर फोर्स मिल्डेनहॉल एयर बेस भेजा गया, जहां अमेरिकी सैन्य अधिकारी इसकी जांच करेंगे और इसके संचालन से परिचित होंगे। ट्रंप से जब विमान बदलने का कारण पूछा गया तो उन्होंने कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा कि वह "पुराने समय की यादों" के कारण पुराने एयर फोर्स वन से वापस जाना चाहते थे।

हालांकि, यह बदलाव ऐसे समय हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। तुर्की की सीमा ईरान से लगती है, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती गई होगी।

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ट्रंप ने भी कहा कि वह ईरान की "शीर्ष निशाने की सूची" में हैं। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर विमान बदलने को सुरक्षा कारणों से नहीं जोड़ा। जब उनसे पूछा गया कि क्या नए विमान में कुछ सुरक्षा प्रणालियां नहीं हैं, तो उन्होंने केवल इतना कहा कि वह सामान्य तरीके से घर लौट रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, कतर से मिले बोइंग 747-8 विमान में अभी पुराने एयर फोर्स वन जैसे सभी अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरण नहीं लगाए गए हैं। इसमें मिसाइल पहचान और बचाव प्रणाली जैसी कुछ तकनीकें अभी पूरी तरह शामिल नहीं हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्टीवन चियुंग ने कहा कि विमान में राष्ट्रपति और उनके कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए आधुनिक सुरक्षा उपाय मौजूद हैं।

इस घटना के दौरान एक और बात चर्चा में रही कि पुराने एयर फोर्स वन विमान का ट्रांसपोंडर कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था। ट्रांसपोंडर विमान की स्थिति की जानकारी देता है और आमतौर पर बेहद संवेदनशील परिस्थितियों में ही इसे बंद किया जाता है।

ईरान के पास ऐसे ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हैं, जो लगभग 1,300 किलोमीटर तक हमला कर सकते हैं। इनमें शाहेद ड्रोन और शहाब मिसाइलें शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी वजह से नया विमान ब्रिटेन भेजा गया हो सकता है, जो ईरान से काफी दूर है।

अमेरिकी वायुसेना के अनुसार, कतर से मिले विमान में फिलहाल केवल जरूरी बदलाव किए गए हैं ताकि इसे जल्दी इस्तेमाल में लाया जा सके। कई जटिल तकनीकी सुधार बाद में किए जाएंगे।

मौजूदा एयर फोर्स वन विमानों को शीत युद्ध के दौर में बेहद मजबूत सुरक्षा मानकों के साथ तैयार किया गया था। इनमें परमाणु हमले के प्रभाव से बचाव, मिसाइल सुरक्षा प्रणाली, सुरक्षित संचार नेटवर्क, मेडिकल सुविधा और हवा में ईंधन भरने की क्षमता जैसी विशेषताएं शामिल हैं।

अमेरिका नए अगली पीढ़ी के दो एयर फोर्स वन विमानों पर काम कर रहा है, लेकिन परियोजना में देरी के कारण इनके 2028 तक सेवा में आने की उम्मीद है।

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