ट्रंप–नेतन्याहू की बैठक: ईरान के चीन को तेल निर्यात घटाने पर अमेरिका बढ़ाएगा दबाव
ट्रंप और नेतन्याहू ने ईरान पर दबाव बढ़ाने और चीन को उसके तेल निर्यात में कमी लाने पर सहमति जताई। इससे ईरान की आय और पश्चिम एशिया की राजनीति प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच व्हाइट हाउस में हुई बैठक में ईरान पर दबाव बढ़ाने को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेताओं ने तय किया कि अमेरिका ईरान के चीन को होने वाले तेल निर्यात को कम कराने के लिए कड़ा रुख अपनाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों ने ईरान के खिलाफ “मैक्सिमम प्रेशर” यानी अधिकतम दबाव की नीति को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि चीन ईरान के कुल तेल निर्यात का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खरीदता है। ऐसे में यदि इस व्यापार में कमी आती है तो ईरान की तेल आय पर बड़ा असर पड़ेगा।
रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक और रणनीतिक दबाव बढ़ाने के लिए नए कदम उठा सकता है। यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब पिछले सप्ताह अमेरिकी और ईरानी राजनयिकों के बीच ओमान की मध्यस्थता में परमाणु वार्ता हुई थी, जिसका उद्देश्य कूटनीतिक प्रयासों को फिर से शुरू करना था।
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इसी बीच अमेरिका ने क्षेत्र में नौसैनिक बेड़े की तैनाती भी की है। अमेरिकी सेना संभावित लंबे समय तक चलने वाले सैन्य अभियानों की तैयारी कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का संकेत है।
यदि ईरान का चीन को तेल निर्यात कम होता है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी असर पड़ सकता है। इस घटनाक्रम को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और शक्ति संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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