नाटो पर विवादित बयान के बाद ट्रंप ने ब्रिटिश सैनिकों की जमकर की सराहना
नाटो सैनिकों पर विवादित बयान के बाद ट्रंप ने अफगानिस्तान में लड़ने वाले ब्रिटिश सैनिकों की प्रशंसा की, हालांकि उन्होंने अपने पुराने बयान पर माफी नहीं मांगी।
नाटो सैनिकों को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार (24 जनवरी, 2026) को अफगानिस्तान में लड़ने वाले ब्रिटिश सैनिकों की खुलकर सराहना की। सोशल मीडिया पर किए गए इस बयान को इस सप्ताह की गई उनकी टिप्पणियों से आंशिक यू-टर्न के रूप में देखा जा रहा है, जिन पर ब्रिटेन में तीखी आलोचना हुई थी, खासकर उन सैनिकों के परिजनों की ओर से जिन्होंने युद्ध में अपनी जान गंवाई या गंभीर रूप से घायल हुए।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर से बातचीत के बाद ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि “यूनाइटेड किंगडम के महान और बेहद साहसी सैनिक हमेशा संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ खड़े रहेंगे।” उन्होंने अफगानिस्तान में मारे गए 457 ब्रिटिश सैनिकों और गंभीर रूप से घायल जवानों को “अब तक के सबसे महान योद्धाओं में से” बताया।
ट्रंप ने यह भी कहा कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच का रिश्ता “इतना मजबूत है कि कभी टूट नहीं सकता” और ब्रिटेन “दिल और आत्मा से भरपूर देश है, जो अमेरिका को छोड़कर किसी से कम नहीं।”
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यह बयान उस इंटरव्यू के बाद आया है, जो ट्रंप ने गुरुवार (22 जनवरी, 2026) को स्विट्ज़रलैंड के दावोस में दिया था। इसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें यकीन नहीं है कि नाटो के अन्य 31 देश ज़रूरत पड़ने पर अमेरिका का साथ देंगे और यह भी आरोप लगाया था कि उनके सैनिक “अफगानिस्तान में अग्रिम मोर्चे से कुछ दूर” रहते थे।
हालांकि ट्रंप ने इन टिप्पणियों के लिए न तो माफी मांगी और न ही उन्हें वापस लिया। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इन बयानों को “अपमानजनक और बेहद निंदनीय” बताया था। रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को हुई बातचीत में अफगानिस्तान युद्ध, यूक्रेन संघर्ष और आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
वास्तविकता यह है कि 9/11 हमलों के बाद अक्टूबर 2001 में अमेरिका के नेतृत्व में अफगानिस्तान में अल-कायदा और तालिबान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बना, जिसमें नाटो समेत दर्जनों देशों की सेनाएं शामिल थीं। अफगानिस्तान में 1.5 लाख से अधिक ब्रिटिश सैनिकों ने सेवा दी, जो अमेरिका के बाद सबसे बड़ा सैन्य योगदान था। ट्रंप के बयानों पर इटली और फ्रांस ने भी आपत्ति जताते हुए उन्हें “अस्वीकार्य” बताया।
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