अफगानिस्तान में नाटो सैनिकों पर ट्रंप की टिप्पणी को ब्रिटिश पीएम ने बताया अपमानजनक, माफी की मांग
अफगानिस्तान में नाटो सैनिकों पर ट्रंप की टिप्पणी से ब्रिटेन में नाराज़गी है। प्रधानमंत्री स्टारमर ने बयान को अपमानजनक बताया, जबकि प्रिंस हैरी ने सैनिकों के बलिदान को सम्मान देने की अपील की।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अफगानिस्तान युद्ध को लेकर गैर-अमेरिकी नाटो सैनिकों पर की गई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने संकेत दिया कि ट्रंप को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए। स्टारमर ने इन टिप्पणियों को “अपमानजनक” और “चौंकाने वाला” बताया। ट्रंप ने दावा किया था कि गैर-अमेरिकी नाटो सैनिक अग्रिम मोर्चे से दूर रहे और अमेरिका की मदद के लिए वास्तव में आगे नहीं आए।
स्विट्ज़रलैंड के दावोस में एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि जरूरत पड़ने पर नाटो अमेरिका का समर्थन करेगा। उन्होंने कहा कि कुछ देशों ने अफगानिस्तान में सैनिक भेजे जरूर, लेकिन वे अग्रिम मोर्चे से दूर ही रहे। इस बयान से ब्रिटेन में राजनीतिक मतभेदों से परे व्यापक नाराज़गी और पीड़ा देखी गई।
प्रधानमंत्री स्टारमर ने अफगानिस्तान युद्ध में मारे गए 457 ब्रिटिश सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि वह उनके साहस, बहादुरी और देश के लिए दिए गए बलिदान को कभी नहीं भूलेंगे। स्टारमर ने कहा कि ट्रंप की टिप्पणियों से शहीदों के परिजनों और पूरे देश को गहरा आघात पहुंचा है।
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इस विवाद पर प्रिंस हैरी ने भी प्रतिक्रिया दी। बिना ट्रंप का नाम लिए उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में ब्रिटिश सैनिकों के बलिदान को “सच्चाई और सम्मान” के साथ याद किया जाना चाहिए। ब्रिटिश सेना में सेवा दे चुके प्रिंस हैरी ने कहा कि हजारों जिंदगियां हमेशा के लिए बदल गईं, कई माता-पिता ने अपने बच्चों को खोया और अनेक परिवार आज भी इसकी कीमत चुका रहे हैं।
11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद अमेरिका के नेतृत्व में अफगानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बना, जिसमें नाटो देशों सहित दर्जनों राष्ट्र शामिल थे। ब्रिटेन ने खासतौर पर हेलमंद प्रांत में अहम भूमिका निभाई। 2014 में ब्रिटिश सैनिकों की वापसी हुई, जबकि अमेरिकी सेना 2021 तक वहां रही। अनुमान है कि 1.5 लाख से अधिक ब्रिटिश सैनिकों ने अफगानिस्तान में सेवा दी।