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ईरान संघर्ष के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में 3,500 मरीन और युद्धपोत तैनात किए

अमेरिका ने ईरान तनाव के बीच 3,500 सैनिक और यूएसएस ट्रिपोली मध्य पूर्व भेजा, जिससे सैन्य दबाव बढ़ा, हालांकि जमीनी युद्ध की योजना से इनकार किया गया।

ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत कर दिया है। अमेरिका ने करीब 3,500 मरीन और नौसैनिकों को आधुनिक युद्धपोत यूएसएस ट्रिपोली (LHA-7) के साथ क्षेत्र में तैनात किया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, यह बल 27 मार्च को अपने निर्धारित क्षेत्र में पहुंच गया। यूएसएस ट्रिपोली, जो जापान स्थित अपने बेस से रवाना हुआ था, अब सक्रिय युद्ध क्षेत्र में तैनात हो चुका है। यह अमेरिका के सबसे बड़े उभयचर हमलावर जहाजों में से एक है, जो आधुनिक एफ-35 लाइटनिंग II लड़ाकू विमानों को संचालित करने में सक्षम है।

रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने सिर्फ सैनिक ही नहीं, बल्कि अतिरिक्त परिवहन और हमलावर विमान भी तैनात किए हैं। इस नई तैनाती से पहले ही मध्य पूर्व में लगभग 50,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं, जिन्हें अब और मजबूती मिलेगी।

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यूएसएस ट्रिपोली अब निमिट्ज और फोर्ड श्रेणी के परमाणु विमानवाहक पोतों के साथ इस क्षेत्र में शामिल हो गया है। इस कदम से यह अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ जमीनी अभियान की तैयारी कर सकता है।

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार कहा है कि उनका सीधा जमीनी युद्ध में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है। फिर भी, अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती से अमेरिका के पास सैन्य विकल्पों की संख्या बढ़ गई है।

इस बीच, 28 फरवरी से शुरू हुए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिका ने 11,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमला किया है, जिसमें ईरान की सैन्य सुविधाएं, मिसाइल साइट्स और नौसैनिक संसाधन शामिल हैं।

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