ईरान युद्ध में अमेरिका की मिसाइल क्षमता पर बड़ा असर, पैट्रियट और THAAD स्टॉक आधा हुआ
ईरान संघर्ष के दौरान अमेरिका के मिसाइल भंडार में भारी कमी आई। पैट्रियट और THAAD सिस्टम का उपयोग बढ़ने से रक्षा क्षमता प्रभावित हुई और पुनर्निर्माण में वर्षों लग सकते हैं।
ईरान के साथ हालिया संघर्ष के दौरान बड़े पैमाने पर मिसाइलों के उपयोग के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका की सैन्य क्षमता पर गंभीर असर पड़ा है। रक्षा विशेषज्ञों और पेंटागन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, देश के महत्वपूर्ण मिसाइल भंडार में भारी कमी आई है।
पेंटागन की आंतरिक रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि अमेरिका ने अपने अत्याधुनिक हथियारों का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है। इसमें लगभग 45% प्रिसीजन स्ट्राइक मिसाइलें, लगभग 50% THAAD मिसाइल सिस्टम और करीब 50% पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टर शामिल हैं।
ये आंकड़े अमेरिकी रक्षा विभाग के गोपनीय डेटा से मेल खाते हैं। THAAD सिस्टम का उपयोग बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए किया जाता है, जबकि पैट्रियट सिस्टम हवाई सुरक्षा के लिए अहम माना जाता है।
और पढ़ें: ईरान युद्ध में अमेरिका को 240 मिलियन डॉलर का सबसे महंगा नुकसान, F-35 नहीं बल्कि ड्रोन गिरा
हालांकि, इन स्टॉक्स की भरपाई के प्रयास शुरू हो चुके हैं। रक्षा विभाग ने इस साल कई नए कॉन्ट्रैक्ट मंजूर किए हैं, जिनका उद्देश्य मिसाइल उत्पादन बढ़ाना है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन भंडारों को फिर से भरने में समय लगेगा और इसमें 3 से 5 साल तक लग सकते हैं।
पूर्व अमेरिकी मरीन कोर कर्नल मार्क कैंसियन ने कहा कि हथियारों की कमी के कारण पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है। उनके अनुसार, इन भंडारों को पूरी तरह बहाल करने में कई साल लग सकते हैं।
इस बीच, युद्धविराम के चलते रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका इस समय का उपयोग अपनी सैन्य क्षमता को पुनर्गठित करने में कर सकता है। यह स्थिति तब और महत्वपूर्ण हो गई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने की घोषणा की।
और पढ़ें: चीन-ईरान गठजोड़ पर सवाल, क्या बीजिंग के जासूसी सैटेलाइट से अमेरिकी ठिकानों को बनाया गया निशाना?