×
 

ईरान के साथ कूटनीति पर क्यों दांव लगा रहा है क़तर

अमेरिका–ईरान तनाव के बीच क़तर कूटनीति को रणनीतिक जोखिम प्रबंधन मानते हुए मध्यस्थता पर जोर दे रहा है, ताकि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध, अस्थिरता और आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।

ईरान और अमेरिका के बीच टकराव अब एक अधिक अस्थिर चरण में प्रवेश कर चुका है, जिसमें प्रत्यक्ष सैन्य हमले, तीखी बयानबाज़ी और लंबे समय से चली आ रही सीमाओं का क्षरण शामिल है। ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमलों से लेकर पूरे क्षेत्र में तेहरान की संतुलित जवाबी कार्रवाइयों तक, संघर्ष के फैलने का खतरा अब केवल सैद्धांतिक नहीं रहा। खाड़ी देशों के लिए, जिनकी सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता सीधे तौर पर किसी भी अमेरिका–ईरान संघर्ष से जुड़ी है, इसके परिणाम तुरंत और गंभीर हो सकते हैं। इसी पृष्ठभूमि में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच क़तर की कूटनीति को समझा जाना चाहिए—यह तटस्थता नहीं, बल्कि बढ़ते जोखिमों को सीमित करने की एक रणनीतिक कोशिश है।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर हमेशा दोनों देशों से आगे तक गया है। ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों और हजारों मौतों की रिपोर्टों के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाज़ी और सख्त हो गई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्तक्षेप की धमकी ने खाड़ी क्षेत्र में कूटनीति की आवश्यकता को और बढ़ा दिया। खाड़ी की भौगोलिक स्थिति, ऊर्जा ढांचे की सघनता और आपसी सुरक्षा निर्भरता के कारण सीमित टकराव भी तेजी से क्षेत्रीय संकट में बदल सकता है। ऐसे में क़तर ने लगातार तनाव कम करने, मध्यस्थता और संवाद के चैनल खुले रखने को प्राथमिकता दी है।

क़तर अमेरिका और ईरान के बीच एक विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में उभरा है। तेहरान के साथ अपने संबंधों और वॉशिंगटन के साथ रणनीतिक साझेदारी के आधार पर दोहा ने ऐसे गोपनीय संवाद चैनल बनाए रखे हैं, जो सीधे बातचीत कठिन होने पर भी संपर्क बनाए रखते हैं। सितंबर 2023 में कैदियों की अदला-बदली और मानवीय उद्देश्यों के लिए जमे ईरानी फंड की रिहाई इसी का उदाहरण है।

और पढ़ें: गाज़ा को लेकर इज़राइल की असली मंशा क्या है? टालमटोल, विभाजन और बाधाओं की रणनीति

क़तर का मानना है कि ईरानी परमाणु मुद्दे और अमेरिका–ईरान तनाव को केवल सैन्य दबाव से स्थायी रूप से नहीं सुलझाया जा सकता। जून 2025 में क़तर के अल-उदीद एयरबेस पर ईरान के मिसाइल हमले के बाद भी दोहा ने तुरंत दोनों पक्षों से संपर्क कर संकट को बढ़ने से रोका। क़तर की यह भूमिका दिखाती है कि युद्ध की भारी कीमत चुकाने वाले क्षेत्र में कूटनीति आदर्शवाद नहीं, बल्कि व्यावहारिक जोखिम प्रबंधन है।

और पढ़ें: अमेरिका के बाद इज़राइल ने कई संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं से संबंध तोड़े

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share