ओडिशा में मिले पांच अनाथ ऑरंगउटान: 20 अरब डॉलर के वन्यजीव तस्करी रैकेट का खुला राज़
ओडिशा के जंगलों में मिले पांच नवजात ऑरंगउटानों ने अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया। सुमात्रा से थाईलैंड, म्यांमार होते हुए भारत पहुंचीं इन शावकों को जंगल में छोड़ दिया गया था।
पूर्वी भारत के ओडिशा राज्य में हाल ही में जंगल की झाड़ियों में सहमे हुए पांच शावक मिले, जिन्हें देखकर करीब एक हज़ार ग्रामीण हैरान रह गए। लाल-भूरे रंग के बालों और बड़ी-बड़ी आंखों वाले ये जीव कोई आम जानवर नहीं, बल्कि गंभीर रूप से लुप्तप्राय ऑरंगउटान शावक निकले — एक ऐसी प्रजाति, जो भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर, इंडोनेशिया और बोर्नियो के वर्षावनों की मूल निवासी है।
वन अधिकारी प्रतीक प्रकाश इंदलकर के अनुसार, 18 महीने से कम उम्र के ये पांचों शावक अपनी माताओं से अलग कर दिए गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक जगह इतने समान उम्र के पांच ऑरंगउटान शावक जुटाना लगभग असंभव है, जब तक कि उन्हें जंगल से सीधे न पकड़ा गया हो — जिसके लिए पहले उनकी माताओं की हत्या करनी पड़ी होगी, क्योंकि मादा ऑरंगउटान अपने बच्चों की रक्षा के लिए अंत तक लड़ती हैं।
संरक्षणवादियों के अनुसार, इंडोनेशिया में कुछ ग्रामीणों को एक शावक पकड़ने के बदले करीब 846 डॉलर तक का भुगतान किया जाता है। इसके बाद शावकों को हफ्तों तक अंधेरे डिब्बों में बंद रखकर तस्करी के नेटवर्क से गुज़ारा जाता है, जिसमें भूख, डर और निर्जलीकरण आम बात है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन शावकों की यात्रा सुमात्रा के आचे प्रांत से शुरू होकर मछली पकड़ने वाली नावों के ज़रिए थाईलैंड, फिर म्यांमार के रास्ते भारत के मणिपुर या मिज़ोरम की सीमा से होते हुए पूरी हुई होगी। पश्चिम बंगाल के दीघा में सीसीटीवी फुटेज में वाहनों की अदला-बदली भी दर्ज हुई है, जिसकी अब जांच हो रही है।
फिलहाल पांचों शावक ओडिशा के नंदनकानन चिड़ियाघर में पृथकवास में हैं, जहां पशु चिकित्सक उनकी सेहत की निगरानी कर रहे हैं और उन्हें खिलौने देकर सहज बनाने की कोशिश हो रही है। इंडोनेशियाई दूतावास के अनुसार, एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही डीएनए जांच के लिए भारत आएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इन्हें निजी संग्रहकर्ताओं या अवैध चिड़ियाघरों के लिए तस्करी किया जा रहा था। भारत और इंडोनेशिया दोनों देशों की एजेंसियां अब इस मामले की संयुक्त जांच कर रही हैं।