AI नहीं ले सकता मौसम वैज्ञानिकों की जगह, पूर्वानुमान में मानव भूमिका अब भी अहम
आईएमडी के अनुसार AI मौसम पूर्वानुमान में सहायक है, लेकिन यह भौतिक मॉडलों और वैज्ञानिकों की भूमिका को पूरी तरह नहीं बदल सकता, मानव विशेषज्ञता अभी भी जरूरी है।
मौसम पूर्वानुमान के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती भूमिका के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरी तरह से मानव प्रयासों की जगह नहीं ले सकता। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने हाल ही में “मौसम और जलवायु में एआई/एमएल के उपयोग” के लिए एक विशेष कार्य समूह का गठन किया है, जो इस दिशा में शोध कर रहा है।
आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने स्पष्ट किया कि एआई भौतिक मॉडलों का विकल्प नहीं बन सकता। उनके अनुसार, एआई मुख्य रूप से सांख्यिकीय डेटा पर आधारित होता है और यह वायुमंडल की भौतिक प्रक्रियाओं को पूरी तरह समझने में सक्षम नहीं है। इसलिए मौसम पूर्वानुमान में भौतिकी आधारित मॉडल आज भी बेहद जरूरी हैं।
उन्होंने बताया कि यदि एआई आधारित मॉडलों को पारंपरिक भौतिक मॉडलों के साथ जोड़ा जाए, तो मौसम का पूर्वानुमान अधिक तेज और प्रभावी तरीके से किया जा सकता है। वर्तमान में आईएमडी लगभग 10 अलग-अलग मौसम पूर्वानुमान मॉडलों का उपयोग कर रहा है, जिनमें एआई आधारित मॉडल भी शामिल हैं।
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डॉ. महापात्र ने यह भी कहा कि मौसम पूर्वानुमान एक “प्रारंभिक मान समस्या” (Initial Value Problem) है। इसका मतलब है कि यदि हमारे पास तापमान, दबाव, हवा की गति और दिशा, तथा निम्न और उच्च दबाव प्रणाली जैसे सटीक आंकड़े हों, तो पूर्वानुमान अधिक सटीक हो सकता है।
इस प्रकार, एआई मौसम विज्ञान में सहायक भूमिका निभा सकता है, लेकिन मानव विशेषज्ञता और वैज्ञानिक समझ अभी भी इस क्षेत्र की आधारशिला बनी हुई है।
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