एआई आपकी नौकरी नहीं छीनेगा, लेकिन एआई का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति आपकी जगह ले सकता है: विशेषज्ञ
कृत्रिम बुद्धिमत्ता रोजगार के स्वरूप को तेजी से बदल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई से डरने के बजाय तकनीकी दक्षता, मानवीय कौशल और लगातार सीखने पर ध्यान देना चाहिए।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच नौकरियों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई अधिकांश नौकरियां खत्म करने के बजाय काम करने के तरीके को बदल देगा। हालांकि, जो कर्मचारी एआई का प्रभावी इस्तेमाल करना सीखेंगे, वे उन लोगों से आगे निकल सकते हैं जो इससे दूरी बनाए रखेंगे।
टैग्ड के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवाशीष शर्मा के अनुसार, एआई से तकनीक विकसित करने, उसका प्रबंधन करने और कारोबारी समस्याओं में उसका इस्तेमाल करने वाले पदों की मांग बढ़ेगी। वहीं, दोहराए जाने वाले और नियमित कामों की भूमिका में बड़ा बदलाव आएगा।
कोलकाता स्थित संजय सराफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के संस्थापक सीएफए संजय सराफ ने एआई, डेटा विश्लेषण, साइबर सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन, निवेश अनुसंधान और धोखाधड़ी की पहचान जैसे क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं बढ़ने की बात कही। उनके मुताबिक डेटा एंट्री, नियमित रिपोर्टिंग, मिलान और तय प्रारूप वाले अनुसंधान जैसे काम अधिक जोखिम में हैं। उनका कहना है कि असली खतरा एआई नहीं, बल्कि वह पेशेवर है जो एआई का बेहतर इस्तेमाल करता है।
और पढ़ें: स्वैच्छिक शुल्क भुगतान के लिए अब भौतिक चालान की जरूरत नहीं
ऑप्टोमा टेक्नोलॉजी इंडिया के प्रबंध निदेशक विजय शर्मा ने एआई एकीकरण, स्वचालन, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, सॉफ्टवेयर विकास और स्मार्ट एवी सिस्टम में अवसर बढ़ने की संभावना जताई। वहीं, मैनुअल डेटा एंट्री, प्रशासनिक कार्य और ग्राहक सेवा में स्वचालन बढ़ सकता है।
एलपीयू के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. लोवी राज गुप्ता ने कहा कि तकनीकी बदलावों ने हमेशा काम की प्रकृति बदली है। इसलिए छात्रों को एआई, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, पाइथन, एसक्यूएल, क्लाउड इंजीनियरिंग और साइबर सुरक्षा के साथ-साथ आलोचनात्मक सोच, निर्णय क्षमता, रचनात्मकता, संवाद और टीमवर्क पर ध्यान देना चाहिए।
विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और कंपनियों को मिलकर लगातार कौशल प्रशिक्षण, व्यावहारिक शिक्षा, इंटर्नशिप और उद्योग आधारित परियोजनाओं को बढ़ावा देना होगा। भर्ती में केवल डिग्री के बजाय वास्तविक क्षमता, पोर्टफोलियो और व्यावहारिक अनुभव को अधिक महत्व दिया जा सकता है।
ग्रासिक सर्च के निदेशक सिद्धार्थ ठाकुर ने कहा कि पेशेवरों को एआई की समझ, उसके गलत परिणामों पर सवाल उठाने की क्षमता और मजबूत मानवीय संबंध कौशल विकसित करने चाहिए। नियमित रूप से नई तकनीक सीखना और दूसरे क्षेत्रों में एआई के इस्तेमाल को समझना भविष्य के करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
और पढ़ें: सेंसेक्स और निफ्टी मामूली बढ़त के साथ बंद, होर्मुज जलडमरूमध्य पर अनिश्चितता का असर