गांधीनगर में भारत की दूसरी बीएसएल-4 जैव-सुरक्षा प्रयोगशाला की आधारशिला, स्वास्थ्य सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती
अमित शाह ने गांधीनगर में भारत की दूसरी बीएसएल-4 लैब की आधारशिला रखी, जिससे जैव-सुरक्षा, स्वास्थ्य अनुसंधान और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी।
गांधीनगर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर, गांधीनगर में अत्याधुनिक बीएसएल-4 (बायो-सेफ्टी लेवल-4) जैव-सुरक्षा सुविधा की आधारशिला रखी। यह परियोजना भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा और जैव-सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है।
सभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विज़न को दर्शाती है, जिसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी को राष्ट्रीय विकास का आधार माना गया है। उन्होंने बीएसएल-4 सुविधा को देश की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए “सुरक्षात्मक कवच” बताते हुए कहा कि इससे जैव-सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के एक नए युग की शुरुआत होगी।
₹362 करोड़ की लागत से 11,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनने वाली यह प्रयोगशाला पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के बाद देश की दूसरी बीएसएल-4 लैब होगी। यह राज्य सरकार द्वारा स्थापित पहली उच्च स्तरीय जैव-सुरक्षा प्रयोगशाला भी होगी। इसके संचालन में आने के बाद भारतीय वैज्ञानिक अत्यधिक संक्रामक और घातक वायरस पर सुरक्षित वातावरण में शोध कर सकेंगे, जिससे विदेशी प्रयोगशालाओं पर निर्भरता काफी कम होगी।
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अमित शाह ने बताया कि यह प्रयोगशाला ज़ूनोटिक रोगों के अध्ययन के लिए विश्वस्तरीय ढांचा उपलब्ध कराएगी। ऐसे रोग, जो जानवरों से इंसानों में फैलते हैं, कुल संक्रामक बीमारियों के लगभग 60 से 70 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि यह सुविधा भारत के ‘वन हेल्थ मिशन’ के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य मानव, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य की रक्षा करना है।
गृह मंत्री ने भारत के जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र की तेज़ प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की बायो-इकोनॉमी 2014 में 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 166 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। उन्होंने युवाओं को “जॉब क्रिएटर” बताते हुए भारत की वैक्सीन निर्माण में वैश्विक नेतृत्व की भी सराहना की।
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