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वंदे मातरम् की विरासत सीमित करने के फैसले का इतिहास बताए कांग्रेस: असम बीजेपी

असम बीजेपी ने कांग्रेस से वंदे मातरम् की विरासत सीमित करने के कथित फैसले का इतिहास सार्वजनिक करने को कहा और इसे राष्ट्रीय गौरव से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।

वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक बहस के बीच असम भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। पार्टी ने कांग्रेस से मांग की है कि वह वंदे मातरम् की विरासत को सीमित करने से जुड़े अपने फैसले के पीछे का इतिहास और कारण देश के सामने स्पष्ट करे।

असम बीजेपी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि वंदे मातरम् का ऐतिहासिक महत्व भारत के राष्ट्रीय गौरव से गहराई से जुड़ा हुआ है। पार्टी के अनुसार, इस राष्ट्रीय गीत से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को राजनीतिक तुष्टीकरण, सांप्रदायिक दबाव या संकीर्ण वोट-बैंक की राजनीति के आधार पर प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।

बीजेपी ने कहा कि वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसके माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोगों में देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना की भावना मजबूत हुई थी। पार्टी का तर्क है कि ऐसे ऐतिहासिक प्रतीकों को राजनीतिक लाभ-हानि के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

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असम बीजेपी ने कांग्रेस से यह भी पूछा कि यदि अतीत में वंदे मातरम् को लेकर कोई ऐसा निर्णय लिया गया था, जिससे इसकी विरासत या सार्वजनिक महत्व सीमित हुआ, तो उसके पीछे परिस्थितियां क्या थीं। पार्टी ने कांग्रेस से संबंधित घटनाक्रम और फैसले का पूरा इतिहास सामने रखने की मांग की है।

बीजेपी के अनुसार, देश के राष्ट्रीय प्रतीकों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े विषयों पर राजनीतिक दलों को व्यापक राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संघर्ष और राष्ट्रीय भावना से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत है।

बयान में यह भी कहा गया कि देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय विरासत को लेकर किसी भी प्रकार का फैसला पारदर्शिता और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर होना चाहिए। असम बीजेपी ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने और अपने पुराने फैसलों के पीछे के कारणों को सार्वजनिक करने की मांग की।

वंदे मातरम् को लेकर यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब देश में राष्ट्रीय प्रतीकों, स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास और उनके राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर बहस जारी है। बीजेपी के इस बयान से इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।

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