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असम में हर पांच साल में हो मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण, बीजेपी मंत्री जयंत मल्ला बरुआ की मांग

असम के मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने हर पांच साल में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण कराने की मांग की। उन्होंने अवैध प्रवासन और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा उठाया।

असम में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने हर पांच साल में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य राज्य की मतदाता सूची से विदेशी नागरिकों के नाम हटाना और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता सुनिश्चित करना है।

मंगलवार को असम के नलबाड़ी में आयोजित जन जागरण समदल रैली के दौरान बरुआ ने यह बात कही। उन्होंने दावा किया कि असम में एसआईआर की जरूरत है, ताकि मतदाता सूची में किसी भी विदेशी नागरिक का नाम न रहे।

कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना

बरुआ ने कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) को लेकर विपक्ष के आरोपों और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की आलोचना की।

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मंत्री ने कहा कि कांग्रेस जनता के साथ खड़ी नहीं होती, इसलिए उसे चुनावों में हार का सामना करना पड़ता है। उनके मुताबिक, हार के बाद पार्टी कभी ईवीएम, कभी बैलेट पेपर और कभी अन्य मुद्दों को जिम्मेदार ठहराती है।

उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की हालिया टिप्पणी का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने विपक्ष को बैलेट पेपर के जरिए चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी।

असम में अवैध प्रवासन का मुद्दा

बरुआ ने असम के छह साल लंबे अवैध प्रवासन विरोधी आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में मतदाता सूचियों की विशेष जांच की आवश्यकता है। असम में अवैध प्रवासन का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा रहा है।

आयोजकों के अनुसार, नलबाड़ी की रैली में 30,000 से अधिक लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में युवाओं और महिलाओं ने केंद्र तथा असम की बीजेपी-नीत सरकारों के प्रति समर्थन जताया।

बरुआ ने दावा किया कि युवा और महिलाएं राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार के रुख का समर्थन करने के लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का विरोध करने वाले समूहों की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि वे देश के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं।

मंत्री की यह मांग ऐसे समय आई है, जब देश में मतदाता सूचियों, चुनावी पारदर्शिता और विपक्ष के आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। हर पांच साल में एसआईआर कराने का प्रस्ताव असम में चुनावी प्रक्रिया और अवैध प्रवासन से जुड़े मुद्दों को फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है।

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