असम में मतदाता सूची से नाम हटाने की साजिश का आरोप, विपक्ष ने जताई बीजेपी की भूमिका
असम में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि फर्जी आपत्तियों के जरिए निर्दोष मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और इसके पीछे बीजेपी की साजिश है।
असम में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (स्पेशल रिविजन – SR) प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर विपक्षी दलों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस सहित छह राजनीतिक दलों के नेताओं ने रविवार (25 जनवरी 2026) को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer) को एक ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के इशारे पर फर्जी आपत्तियां दाखिल की जा रही हैं, ताकि अनजान और निर्दोष मतदाताओं के नाम मसौदा मतदाता सूची से हटाए जा सकें।
विपक्षी दलों का कहना है कि जिन लोगों के नाम पर आपत्तियां दर्ज की गई हैं, उन्हें इसकी कोई जानकारी तक नहीं है। आरोप है कि कई मामलों में ऐसे व्यक्तियों के नाम से आपत्तियां दाखिल की गईं, जिन्होंने कभी किसी मतदाता के खिलाफ शिकायत नहीं की। इससे आशंका जताई जा रही है कि यह पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने और चुनावी लाभ के लिए मतदाता सूची में हेरफेर करने की कोशिश है।
कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन मतदाताओं के नाम बिना उनकी जानकारी के हटाए गए हैं, उन्हें तुरंत सूची में बहाल किया जाए। विपक्ष ने यह भी कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो वे इसे लेकर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ेंगे।
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निर्वाचन आयोग द्वारा 27 दिसंबर 2025 को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची के अनुसार, असम में कुल मतदाताओं की संख्या 2.51 करोड़ दर्ज की गई है। इस दौरान 4.78 लाख मतदाताओं को मृत घोषित किया गया, 5.23 लाख मतदाताओं के स्थानांतरण की पुष्टि हुई और 53,619 दोहरे नामों को हटाया गया।
निर्वाचन अधिकारियों का दावा है कि इस प्रक्रिया के तहत 61 लाख से अधिक परिवारों को कवर करते हुए 100 प्रतिशत सत्यापन किया गया है। हालांकि विपक्ष इन दावों पर सवाल उठा रहा है और पारदर्शिता की मांग कर रहा है।
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